बाबा विश्वनाथ मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह में बुधवार को भगवान कृष्ण के विवाह की लीला प्रसंग का वर्णन किया गया। इस दौरान भक्तों ने नगर में बैंडबाजों के साथ धूमधाम से भगवान कृष्ण की बारात निकाली।
मोहल्ला सराफान के लोग बुधवार दोपहर सौरिख रोड स्थित सिद्धपीठ मां कालिकादेवी मंदिर के पास एकत्र हुए। वहां पूजा-अर्चना के साथ भगवान कृष्ण की बारात निकाली गई। भगवान कृष्ण के स्वरूप में इटावा के सुशील की छटा देखने लायक थी। बैंडबाजों की धुन पर भक्त जमकर नांचे। बारात सौरिख रोड से मोहल्ला भैनपुरा मार्ग होते हुए सराफान स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर पहुंची। इस दौरान रुक्मिणी के स्वरूप में काजल की सजीव झांकी को देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बाल व्यास आचार्य माधव दीक्षित ने भगवान कृष्ण के विवाह की लीला का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा भगवान भाव के भूखे होते हैं। मानव जन्म संसारिक सुखों के उपभोग के लिए नहीं बल्कि ईश्वर प्राप्ति के लिए लगाएं। ईश्वर के स्मरण मात्र से ही दुखों का अंत हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए भक्ति जरूरी है। भक्ति भाव की व्याख्या करते हुए कहा कि गोपियां कृष्ण के साथ वन में नहीं गई और न ही घर का त्याग किया। फिर भी स्वधर्म का पालन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण को पा लिया। उन्होंने कहा कि योगी को जो आनंद योग्य से मिलता है वह घर में रहते हुए भी पाया जा सकता है।