कन्नौज। आलू के दाम बढ़ने का असर इस बार किसानों पर भी पड़ रहा है। छोटे किसानों की पहुंच से अधिक दाम होने से 10 साल बाद जिले में आलू का रकबा घट गया है। छोटे किसान एक दो बीघा तक का बीज खरीदने की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।
जिले में वर्ष 2010 से जिला उद्यान विभाग को आलू के लिए 48 हजार या 48500 हेक्टेयर तक लक्ष्य मिलता था। इस बार 46 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है। इसकी प्रमुख वजह आलू बीज के दाम दोगुना से अधिक होना है। इस समय सफेद आलू बीज 1200 रुपये और लाल गुलाल आलू 1500 रुपये प्रति पैकेट (50 किलो) में मिल रहा है।
---------
आलू किसान बोले...
किसान अतुल पाल ने बताया वह पांच बीघे में आलू की खेती करते थे। पिछली साल आलू के दाम अच्छे होने से कच्ची फसल खोदकर बेच दी थी। इसकी वजह से आलू बीज नहीं बच पाया। इस बार आलू बीज महंगा होने से एक दो बीघा में ही बुवाई करेंगे।
--
प्रमोद कुमार का कहना है कि 10 बीघे में आलू की खेती करते हैं। पिछली बार आलू के दाम अच्छे रहे। इसकी वजह से इस बार इससे अधिक आलू करने का विचार है। कुछ आलू बीज कम हो गया है। इससे महंगे दामों पर खरीदेंगे।
वीरेंद्र कुमार ने बताया आलू बीज के दाम आसमान छू रहे हैं। आलू में सबसे अधिक लागत आती है। इसलिए इस बार सिर्फ घर में खाने व बीज के लिए आलू करेंगे। इस बार जरूरी नहीं है कि आलू के दाम अच्छे ही मिले।
आलू बीज महंगा होने की वजह से छोटे किसान बहुत कम आलू की खेती कर रहे हैं। इस बार 46 हेक्टेयर आलू गुड़ाई का लक्ष्य मिला है। इसमें कुछ कम या ज्यादा हो सकता है।
-मनोज चतुर्वेदी, जिला उद्यान अधिकारी।
================