33/11 केवी पुराने सब स्टेशन में वीसीबी की ट्राली
बदलकर फीडर नंबर एक और दो को अलग कर दिया गया। तीन माह से एक वैक्यूम
सकर्टि ब्रेकर मशीन (वीसीबी) खराब पड़ी थी। इसके कारण फीडर नंबर एक और दो
को एक ही वीसीबी से आपूर्ति दी जा रही थी।
ज्ञात हो कि फीडर नंबर दो में
आए दिन फाल्ट से फीडर नंबर एक की आपूर्ति भी ठप हो जाती थी। काफी तलाशने
के बावजूद खराब पड़ी वीसीबी का पार्ट नहीं मिला। आखिरकार शुक्रवार को नए 33
केवी माडल सब स्टेशन की नई ट्राली इसमें लगाकर दोनों फीडर अलग कर दिए गए।
पिछले सप्ताह ओवरलोडिंग के चलते फीडर नंबर दो की वीसीबी में लगी रिले जल गई
थी।
इसे भी अब तक नहीं लगाया जा सका है, पर जेई अवनीश कुमार ने जुगाड़
करके वीसीबी से आपूर्ति बहाल कर दी थी। एक्सईएन आरएन वर्मा ने बताया कि
फीडर नंबर दो सबसे बड़े क्षेत्र में काफी लंबाई तक फैला है, जबकि फीडर नंबर
तीन आधे शहर की घनी बस्तियों को कवर करता है।
बताया कि आरएपीडीआरपी
स्कीम के तहत दोनों फीडरों को दो-दो भागों में बांटने के लिए नए पोल और तार
लगाकर पुराने सब स्टेशन की सीमा तक काम पूरा हो चुका है। इनके लिए नई
वीसीबी मशीनें मिलते ही यह काम भी पूरा हो जाएगा। इसके अलावा शहर में रखे
630 केवीए ट्रांसफार्मरों को हटवाकर उनकी जगह 400 और 250 केवीए के
ट्रांसफार्मर लगवाए जाएंगे।
उधर, फीडर नंबर दो में फाल्ट से साथ जुड़े फीडर
नंबर एक के मोहल्लों में भी आठ घंटे तक बिजली गुल रही। दरअसल फीडर नंबर दो
पर शहर से बाहर ग्राम खल्ला रूपमंगदपुर मोड़ के पास शुक्रवार की सुबह आठ
बजे 11 केवी एचटी लाइन का तार टूट गया।
चार घंटे बाद इसे जोड़ा गया तब कहीं
12.50 बजे आपूर्ति बहाल हो पाई, पर 10 मिनट बाद ही एक से चार बजे तक पनकी
कंट्रोल कानपुर के निर्देशानुसार कटौती शुरू हो गई। इससे आधे से ज्यादा
शहर में शाम चार बजे आपूर्ति बहाल हो पाई। इस बाबत एसडीओ सुधांशु
श्रीवास्तव ने बताया कि आज दोनों फीडरों की वीसीबी अलग हो गई हैं। अब जिस
फीडर में फाल्ट आएगा, केवल उसी की आपूर्ति बंद रहेगी।