तालग्राम। किसानों को अब उर्वरक के लिए बी-पैक्स समितियों के चक्कर और कतार नहीं लगानी पड़ेगी। उर्वरक वितरण के लिए विशेष डिजिटल एप सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है। ताकि आगामी खरीफ सीजन 2026-27 से प्रभावी किया जाएगा। इसके लिए किसानों से पंजीकरण कराने की अपील प्रशासन ने की है।
खाद वितरण बेहतर ढंग से कराने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू की जा रही है। नई व्यवस्था के तहत केवल बी-पैक्स समितियों के पंजीकृत सदस्य किसानों को ही डिजिटल एप के माध्यम से उर्वरक उपलब्ध कराई जाएगी। किसानों को उनकी खेती के रकबे के अनुरूप रासायनिक उर्वरक की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इससे खाद वितरण में अनियमितता, कालाबाजारी और शिकायतों पर नियंत्रण हो सकेगा।
डिजिटल प्रणाली के सफल क्रियान्वयन को लेकर सभी बी-पैक्स समितियों में सदस्यता अभियान तेज कर दिया गया है। किसानों से अपील की गई है कि वे 30 अप्रैल तक 226 रुपये शुल्क अनिवार्य रूप से अपनी संबंधित समिति की सदस्यता ग्रहण कर लें। ताकि भविष्य में उर्वरक प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।
यह तथ्य हो रहे फीड
सहकारिता सूत्रों के मुताबिक, आईएफएमएस पोर्टल पर शेयरधारक (सदस्य) किसान का नाम, फोटो, पता, जोत रकबा व उर्वरक की आवश्यकता की फीडिंग की जा रही है। पहली अप्रैल से इसे आईएफएमएस उर्वरक एप से जोड़कर सुविधा का दायरा बढ़ाया जाएगा।
वर्जन
अपर जिला सहकारी अधिकारी मुनीश गौड़ का कहना है कि सभी समितियों का डाटा राज्य स्तर से फीड किया जा रहा है। किसान बी-पैक्स समितियों की सदस्यता प्राप्त कर लें, ताकि खरीफ सीजन में उर्वरक के लिए समस्या का सामना न करना पड़े।