संत निरंकारी भवन में आयोजित कार्यक्रम में महात्मा
सुशील बाबू ने कहा कि कोई भी धर्म या संत नफरत करना नहीं सिखाता। जब
व्यक्ति में आध्यात्मिकता मजबूत होगी तभी धर्म भी मजबूत होगा।
उन्होंने
कहा कि अच्छे विचारों वाले लोग सत्संग को महत्व देते हैं, जबकि बुरे
विचारों वाले आलोचना करने में ही व्यस्त रहते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे
लोगों का विश्वास परमात्मा पर टिका रहता है, जबकि मनमानी करने वाले ऊंचा
उठने की बजाय अज्ञानता की दलदल में फंस जाते हैं।
कहा कि जिस मनुष्य का
निरंकार प्रभु से प्यार नहीं वह साध संगत से प्यार नहीं कर सकता। इससे मन
बुराई के मार्ग पर चल पड़ता है। कहा कि मन को ठीक रास्ते पर चलाने के लिए
सत्संग की संगत जरूरी है।
इस अवसर पर शशी वर्मा ने भजन तुम्हारा प्यार
मिल जाए जिन्हें एक बार जीवन में, अखिलेश ने भजन सेवा में तेरी सद्गुरु
तन-मन धन लग जाए, सोनी व शालिनी ने भजन दाता मेरे दाता तुझ संग जुड़े जो
मेरा नाता, सुरभि ने भजन तेरे चरणों में बीते उमरिया ही सारी और सानू ने
भजन चैन अमन हो दुनिया में कोई ना रोए सुनाकर सभी को भावविभोर कर दिया।