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जिले के हार्ट मरीज कानपुर के भरोसे

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कन्नौज। अचानक मौसम बदलने से ठंड बढ़ने लगी है। ऐसे में हृदय रोग के मरीजों की मुसीबत भी बढ़ गई है। ओपीडी में हृदय रोग के मामले बढ़ने लगे हैं। जिले में तीन बड़े अस्पताल हैं। तीनों अस्पतालों में हृदय रोग के वार्ड हैं लेकिन हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती ही नहीं हैं। ऐसे में केवल ईसीजी कर मरीजों को कानपुर रेफर कर दिया जा रहा है।
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जिले में राजकीय मेडिकल कालेज तिर्वा, जिला अस्पताल सदर और सौ शय्या अस्पताल छिबरामऊ तीन बड़े अस्पताल हैं। पूर्व सांसद शीला दीक्षित ने विनोद दीक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हृदय रोग की यूनिट की स्थापना कराई थी। जिला अस्पताल बनने पर विनोद दीक्षित सीएचसी में हृदय रोग की यूनिट भी शिफ्ट कर दी गई। जिला अस्पताल में पांच बेड के आईसीयू की स्थापना की गई। इस आईसीयू में वेंटीलेटर तक की सुविधाएं हैं। पहले यहां पर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कात्याल की तैनाती थी, 2012 में तबादला होने के बाद कोई नया डॉक्टर तैनात नहीं किया गया।
सीएमएस डॉ. शक्ति बसु का कहना है कि हृदय रोग विशेषज्ञ और फिजीशियन की तैनाती नहीं हुई है। शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। वहां से अभी जवाब नहीं आया। ईसीजी की सुविधा है। उससे जांच कराई जा रही है।
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बीस से 25 मरीजों की होती है जांच
जिला अस्पताल में ओपीडी और इमरजेंसी में फिजीशियन डॉक्टर के सुझाव पर रोजाना 20 से 25 मरीजों की ईसीजी कराई जाती है। इसके बाद इलाज के लिए उनको कानपुर भेजा जाता है। पिछले कई सालों से वार्ड में एक भी मरीज को भर्ती नहीं किया गया है।
दो साल से नहीं तैनात हैं डॉक्टर
तिर्वा। राजकीय मेडिकल कालेज में हृदय रोगियों को इलाज नहीं मिल रहा। करीब डेढ़ साल पहले हृदय रोग के डॉक्टर की तैनाती थी। उनका तबादला होने के बाद अभी तक किसी डॉक्टर कर तैनाती नहीं हुई है।
सीएमएस डॉ.दिलीप सिंह का कहना है कि डेढ़ साल पहले हृदय रोग के डाक्टर का स्थानांतरण हो गया था। तब से पद खाली है। कालेज में हृदय रोग संस्थान बन चुका है। डॉक्टर व कर्मचारियों के नियुक्ति के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। डॉक्टर नियुक्ति होने के बाद हृदय संस्थान चालू कर मरीजों को लाभ पहुंचाया जाएगा।
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सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय में भी नहीं
छिबरामऊ। नगर के सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू हुए छह साल का समय पूरा होने जा रहा है लेकिन अभी तक यहां ईसीजी जांच की सुविधा भी शुरू नहीं हो सकी है। यहां पर हृदय रोग वार्ड बनने के बाद भी डॉक्टर की तैनाती नहीं की गई है। डॉक्टर की तैनाती नहीं होने से यहां ईसीजी मशीन अभी तक अस्पताल के स्टोर में बंद है। सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी ने बताया कि ईसीजी टेक्नीशियन व हृदय रोग विशेषज्ञ के लिए डीजी स्वास्थ्य को पत्र भेजा गया है। इनके आने के बाद ही अस्पताल में ईसीजी जांच की सुविधा शुरू हो पाएगी।
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