दीवाली पर यात्रियों को सफर में परेशानी से बचाने के लिए कन्नौज डिपो से एक
भी नई रोडवेज बस नहीं चलेगी। पहले की तरह डिपो से 32 बसें कई मार्गों के
लिए चलती रहेंगी।
ज्ञात हो कि बाहर रहने वाले लोग
त्योहारों पर अपने घरों के लिए रवाना होते हैं। निजी एवं सरकारी
कार्यालयों में काम करने वाले लोगों की भीड़ इन त्योहारों पर बढ़ जाती है।
वीवीआईपी जिले के रोडवेज बस डिपो में अब तक ऐसी कोई सूचना नहीं कि यहां से
किसी भी मार्ग पर कोई नई बस चलेगी।
नई बस न चलने से यात्रियों को खासी
मुसीबतें झेलनी पड़ेंगी। संभावना व्यक्त की जा रही कि आठ से 14 नवंबर तक नई
दिल्ली से कानपुर रोड पर जरूर पांच-छह बसें बढ़ाई जा सकतीं हैं। फिलहाल
डिपो से 32 बसों का संचालन सांडी-दिल्ली, हरपाल-दिल्ली, बरुआघाट-दिल्ली,
जाजामऊ-दिल्ली, ठठिया, रसूलाबाद, कन्नौज व दिल्ली के मध्य होगा।
कन्नौज से
20 गाड़ियां दिल्ली के लिए चलतीं हैं। इसके अलावा अन्य डिपों से 200
रोडवेज बसें कन्नौज होकर निकलतीं हैं। त्योहार में इनमें भी भीड़ मिलती है,
जिससे बस स्टाप से यात्रियों को बैठने के लिए जगह नहीं मिलती है। उधर,
दबंगई एवं डग्गामार वाहनों से रोडवेज बसें बंद हो जाती हैं।
केंद्र प्रभारी
का कहना है कि एक बस सेवा तिर्वा, बिधूना, भर्थना होते हुए इटावा तक थी।
करीब एक साल पहले डग्गामार वाहन चालकों व एजेंटों ने बस चालक व परिचालक के
साथ मारपीट कर दी, जिससे वह बस बंद हो गई। मारपीट का मुकदमा भी कोर्ट में
विचाराधीन है।
कन्नौज बस स्टाप से तिर्वा मार्ग से होती हुई औरैया तक
रोडवेज बस शाम पांच बजे निकल जाती है। उसके बाद एक भी रोडवेज औरैया मार्ग
पर नहीं है। बसें न होने की वजह से मैजिक व टेंपो चालकों की चांदी हो जाती
है। टेंपो चालक दिन में 10 रुपये तो मैजिक चालक 15 रुपये लेते हैं। रात
के समय इनका किराया 20-30 रुपये तक हो जाता है।
यह दिक्कत शाम सात बजे हर
रोज होती है। उधर, मंगलवार व गुरुवार को गोरखपुर-बांबे के लिए दो एक्सप्रेस
ट्रेनें चलतीं हैं। करीब एक महीने पहले ही यह गाड़ियां शुरू हुई हैं।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि इनका किराया बहुत अधिक है। इनमें जनरल डिब्बे
ही नहीं हैं।
कभी-कभी रिजर्वेशन में भी दिक्कत आती है, इसलिए किराया सही
ढंग से नहीं दिखता है। वहीं दूसरी ओर त्योहार पर कोई नई ट्रेन चलाने का
आदेश भी कन्नौज स्टेशन नहीं नहीं आया है। रिजर्वेशन में भी प्रतीक्षा सूची
चल रही है।