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Kannauj News: नेपाल का रियाज ही सोना तस्करी का मास्टर माइंड

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कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 15.39 करोड़ रुपये मूल्य की 10 सोने की ईंटों की बरामदगी के बाद अंतरप्रांतीय सोने की तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों की पड़ताल में नेपाल सीमा से सटे महराजगंज के ठूठीबारी बॉर्डर पर परचून की दुकान चलाने वाला रियाज इस पूरे गिरोह का मुख्य सरगना बनकर सामने आया है। कस्टम विभाग और स्थानीय पुलिस अब रियाज के ठिकाने और नेपाल के पल्पा जिले में स्थित उसके सहयोगियों के नेटवर्क को खंगालने में जुट गई है।
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यह मामला तब सामने आया जब सकरावा थानाध्यक्ष भागमल सिंह की सरकारी जीप से महराजगंज नंबर की एक ब्रेजा कार टकरा गई। कार की तलाशी लेने पर उसमें से 24 कैरेट शुद्धता वाली 10 सोने की ईंटें बरामद हुईं, जिनका कुल वजन 10.26 किलोग्राम था। आरोपी कार चालक महाराजगंज निवासी संदीप जायसवाल और नेपाल के सरोज पंथ से जीएसटी और कस्टम अधिकारियों ने सख्ती से पूछताछ की।
पूछताछ में पता चला कि यह सोना नेपाल सीमा से गोरखपुर लाया गया था। वहां से इसे एक्सप्रेसवे के रास्ते दिल्ली पहुंचाया जा रहा था। तस्करों के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे सबसे सुरक्षित मार्ग साबित हो रहा था, क्योंकि यहां नियमित सघन चेकिंग न के बराबर होती है।
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अखिलेश के आरोपों पर पुलिस का खंडन
इस मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि 26 किलो सोने में से केवल 10 किलो दिखाया गया है। एसपी विनोद कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। एसपी ने स्पष्ट किया कि मौके पर बरामदगी की वीडियोग्राफी की गई थी। एसबीआई बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में तराजू पर सोने का वजन कराया गया था। पुलिस के दावों और राजनीतिक बयानों के बीच एलआईयू जांच भी शुरू कर दी गई है। यह जांच किसी भी प्रक्रियात्मक चूक की निष्पक्ष पड़ताल के लिए की जा रही है। कस्टम के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय तस्कर गिरोह होने का शक है। बताया गया कि संदीप व सरोज पंथ को एक खेप पहुंचाने के दो लाख रुपये दिए जाते थे। इसके अलावा कार, होटल समेत सभी सुविधाएं मुहैया कराईं जाती थीं।

रियाज की गिरफ्तारी के प्रयास तेज, कस्टम और पुलिस जुटी
जांच में सामने आया है कि रियाज पिछले कई वर्षों से नेपाल से भारत में अवैध सोना खपाने का सिंडिकेट चला रहा था। उसकी गिरफ्तारी के लिए टीम नेपाल बॉर्डर पर डेरा डाले हुए है। तस्करी में इस्तेमाल कार महज चार घंटे का पास बनवाकर नेपाल दाखिल हुई थी, लेकिन 9.5 घंटे बाद सीमा से वापस लौटी। गोरखपुर में नेपाल के पल्पा निवासी सरोज पंथ ने संदीप को सोना सौंपा था। इसे दिल्ली में एक खास कोड वर्ड के आधार पर डिलीवर किया जाना था। मामले को मजबूत बनाने के लिए पुलिस और कस्टम विभाग इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, कार के जीपीएस डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टोल प्लाजा के सीसीटीवी फुटेज को डिजिटल साक्ष्य के तौर पर केस डायरी में शामिल कर रहे हैं।
वर्जन
इस मामले की जांच सेंट्रल एजेंसियां कर रहीं हैं। ऐसे में सपा प्रमुख का आरोप निराधार हैं। पुलिस के पास सभी डिजिटल साक्ष्य हैं, जिनकी पड़ताल की जा रही है। एलआईयू भी अपने स्तर से जांच कर रही है। नेपाल का रियाज ही तस्करी का असली मास्टर माइंड है।
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-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक
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