एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात।
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कन्नौज। जिला अस्पताल की महिला विंग में संचालित एसएनसीयू (सिक एंड न्यू बोर्न केयर यूनिट) में नवजातों के इलाज में स्टाफ की कमी बाधक बनी हुई है। कई बार डिमांड करने के बावजूद सुनवाई नहीं होती है। अक्तूबर-नवंबर माह में कई बार ऐसा हुआ जब नवजात बच्चों की संख्या वार्ड में अधिक हो गई। नवजातों की जान बचाने के लिए रेडियंट वार्मर पर दो-दो बच्चों को लिटाकर इलाज किया गया। ऐसे में स्टाफ को अधिक भागदौड़ करनी पड़ती है। शासन से तय मानक के मुताबिक 12 नवजात बच्चों के इलाज के लिए सात का स्टाफ होना चाहिए। यह संख्या 19 तक पहुंच जाती है। पिछले चार माह के दौरान करीब छह बच्चे जान गंवा चुके हैं।
एसएनसीयू वार्ड में आठ घंटे की एक शिफ्ट में एक नर्सिंग इंचार्ज, दो स्टाफ नर्स, एक वार्ड आया, एक गार्ड, एक सफाई कर्मी व एक चिकित्सक की तैनाती रहती है। एसएनसीयू वार्ड में ड्यूटी के दौरान चिकित्सक की जिला अस्पताल की ओपीडी की जिम्मेदारी रहती है। इससे चिकित्सक की दौड़भाग अधिक हो जाती है। एसएनसीयू वार्ड के आंकड़ों को देखें तो 21 दिसंबर से 20 जनवरी तक 75 नवजात बच्चे भर्ती हुए। इनमें 39 नवजात वह हैं, जिनका अस्पताल में प्रसव कराया गया। 36 नवजात बच्चे पीएचसी, सीएचसी, मेडिकल कालेज, प्राइवेट अस्पताल से रेफर होकर वार्ड में पहुंचे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ.सुरेश यादव ने कहा कि स्टाफ की दिक्कत रहती है। एसएनसीयू वार्ड में सबसे अधिक दिक्कत बाहर से आने वाले नवजात बच्चों की है। सबसे अधिक केस हरदोई से रेफर होकर आते हैं। नवजातों की गंभीर हालत को देखते हुए भर्ती करना पड़ता है।