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मशरूम ने बदल दी तकदीर, मालामाल हुआ किसान

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किसान महेशचंद्र के साथ मशरूम की जांच करते डॉ. वीके कनौजिया। - फोटो : amarujala
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तकनीक की मदद से एक किसान ने मशरूम की खेती क्या शुरू की, दिन बहुर गए। कभी एक सीजन में एक लाख रुपये की आमदनी के लिए तरस रहा किसान आज हर माह सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये की कमाई कर रहा है। आर्थिक रूप से संपन्न किसानों के साथ खड़े कन्नौज के मुल्लाटोला निवासी किसान महेशचंद्र आज दूसरों को भी तकनीक के सहारे जीवन बदलने की सीख दे रहे हैं।  
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 महेशचंद्र ने बताया कि उन्होंने करीब पांच साल पहले कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष डॉ. वीके कनौजिया और डॉ. अमर सिंह (वैज्ञानिक उद्यान ) की सलाह से मशरूम उत्पादन का काम शुरू किया था। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर से भी मशरूम की पैदावार के लिए जानकारी जुटाई। पहले यह काम छोटे पैमाने पर किया, अब 800 स्क्वायर मीटर के क्षेत्र में मशरूम उगा रहे हैं। कुछ दिनों की मेहनत के बाद मशरूम का उत्पादन शुरू हुआ तो बाजार में अच्छे दाम मिलने लगे। धीरे-धीरे पैदावार में और तेजी आई। इस समय रोजाना 35 से 40 किलो मशरूम पैदा हो रहा है। इसकी बाजार में कीमत करीब सवा सौ रुपये प्रति किलो है। महीने में सवा लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की आमदनी हो रही है।  
इनसेट......
इस तरह की जा रही मशरूम की पैदावार  
कन्नौज। डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि महेश चंद्र खेत में बने पांडाल के अंदर बांस और बल्लियों की सहायता से टियर सिस्टम के तहत पॉलिथीन बिछाने के बाद ऊपर छह इंच मोटी सड़ी हुई कंपोस्ट खाद डालकर मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। कंपोस्ट बनाने में 28-30 दिन का समय लगता है। इसके लिए अच्छा खाने योग्य गेहूं का भूसा, चोकर, मुर्गी की खाद, यूरिया, सुपर फास्फेट तथा पोटाश की आवश्यकता होती है। महेश वर्तमान में दो सौ क्विंटल भूसे को सड़ाकर बड़े पैमाने पर मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। इस भूसे को कंपोस्ट बनाने में 28 दिन का समय लगता है। इसे पहले पानी से भिगोया जाता है, इसके बाद आवश्यक मात्रा में उर्वरक, 40-50 प्रतिशत मुर्गी की खाद तथा 10 प्रतिशत चोकर का प्रयोग कर कंपोस्ट तैयार की जाती। इस दौरान कई बार पलटाई की जाती है। जैसे ही भूसा सड़कर तैयार होता, उसमें कार्बेन्डाजिम तथा फार्मालीन को मिलाया जाता है, इससे कोई अन्य फफूंद पैदा न हो। तैयार कंपोस्ट को मचान के ऊपर समान रूप से फैलाकर 2-3 इंच की परत के बाद बीज मिला देते हैं। इस प्रकार तीन परत बनाते हैं। बीज बुआई के 35-40 दिनों के बाद मशरूम मिलना शुरू हो जाता है।
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महेश चंद्र के अनुसार उन्होंने 200 क्विंटल कंपोस्ट में 325 किलो बटन मशरूम बीज मिलाया। इस समय प्रतिदिन 35 से 40 किलोग्राम मशरूम प्राप्त हो रहा है। इसकी थोक में कीमत करीब 125 रुपये प्रति किलोग्राम है। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग दो से सवा दो लाख का खर्चा आता है। करीब पांच लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है।
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