राइट टू एजूकेशन एक्ट 2009 (आरटीई) के तहत गरीब बच्चों को चिन्हित करने योजना में आज तक एक भी बच्चे का किसी विद्यालय में एडमिशन नहीं कराया गया। केंद्र सरकार यह योजना जनपद में अब तक साकार नहीं हो सकी है। गरीब बच्चों के लिए 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित की जानी थीं, लेकिन योजना का प्रचार-प्रसार न होने और अफसरों के रुचि न लेने से योजना दम तोड़ रही है।
गरीब बच्चों के माता-पिता को योजना के बारे में पता ही नहीं है। अफसरों ने उनको बताने का कोई प्रयास भी नहीं किया। इस योजना के लिए बजट न होने से यह सारी मुश्किलें पेश आईं।
नि:शुल्क शिक्षा और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1)(ग) के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षिक रुप से पिछड़ा वर्ग के बच्चों, नि:शक्त बच्चों निराश्रित बेघर बच्चों, एचआईवी, कैंसर पीड़ित माता-पिता के बच्चों, गरीबी रेखा के नीचे के लोगों के बच्चों, विकलांगता, वृद्धावस्था के लोगों के लिए आसपास के मान्यता प्राप्त स्कूलों में मुफ्त शिक्षा की योजना है।
एक लाख रुपये सालाना आय वाले अभिभावकों के बच्चों को भी इस योजना में फ्री पढ़ाई करवाई जानी है। यदि किसी बस्ती मोहल्ले में एक किलोमीटर की परिधि में परिषदीय सहायता प्राप्त स्कूल नहीं है तो वहां के पात्र बच्चों का दाखिला मान्यता प्राप्त या प्राइवेट स्कूलों में कराने का प्रावधान है।
बच्चों का एडमिशन, फ्री किताबें, ड्रेस निशुल्क है। इन सब सुविधाओं के बाद भी पिछले दो सालों में एक भी छात्र का एडमिशन जिला मुख्यालय में स्थित आठ ब्लाकों में कहीं नहीं हुआ। इसके अलावा जिले का कोई भी विद्यालय बच्चों के दाखिला के आरक्षित भी नहीं है।
विभाग जनवरी माह में एबीएसए से सर्वे कराए जाने की बात कर रहा है। सामुदायिक सहभागिता जिला समन्वयक जय सिंह का कहना है कि राइट टू एजूकेशन का लाभ देने के लिए बराबर प्रयास किए जा रहे हैं। इसके बावजूद दाखिले नहीं हुए हैं। डायरेक्टर बेसिक शिक्षा के निर्देश पर असेवित बस्तियों का सर्वे कराया जा रहा है।
रामकरन यादव बीएसए
प्रश्न-पिछले दो साल से राइट टू एजूकेशन के तहत 25 फीसदी गरीब बच्चों के दाखिला देने की योजना लागू है, फिर भी अभी तक एक भी दाखिला क्यों नहीं हुआ?
उत्तर- मेरा इस जिले में यह पहला सत्र होगा। एडमीशन कराए जाने के लिए जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं। जिन पर विभाग के लोगों को लगाया गया है। बच्चों को उनका अधिकार मिलेगा।
प्रश्न-दो वर्षों में एक भी आवेदन न आने की वजह क्या प्रचार-प्रसार में कमी है?
उत्तर-कार्यभार ग्रहण करने से पहले तत्कालीन बीएसए ने विज्ञापन के माध्यम से प्रचार-प्रसार कराया था। सभी एबीएसए को आवेदन करने का फार्मेट भी भेजा गया, लेकिन कोई आवेदन ही नहीं आया।
प्रश्न-अभी तक कितने विज्ञापन निकलवाए?
उत्तर-हर वर्ष प्रत्येक दो बड़े अखबारों में विज्ञापन निकलवाया जाता है। इसके बावजूद दाखिले नहीं हो सके।
प्रश्न-क्या गरीब तबके के लोगों के लिए इतना प्रचार-प्रसार काफी है?
उत्तर- इस बार स्वयं सेवी संस्थाओं को जोड़ने की रणनीति बनाई गई है। ताकि गरीब तबके के बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया जा सके। हाउस होल्ड सर्वे में 14 बच्चे चिन्हित हुए थे। जो कि विशेष जरूरत वाले थे।
नियमों का जिले में कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। हाउस होल्ड सर्वे के माध्यम से जो बच्चे चिन्हित होते हैं उनका दाखिला कराया जाता है। इस बार बेसिक शिक्षा विभाग की टीम को लगाकर असेवित बस्तियों में इस अभियान को चलाया जाएगा। हालांकि स्कूल चिन्हित किए जाने का अलग से कोई प्राविधान नहीं है। इस तरह के बच्चे चिन्हित होने पर जहां पर सरकारी विद्यालय नहीं है तो आसपास के प्राइवेट विद्यालय में दाखिला कराए जाने का प्राविधान है।
अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी