भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को
गांव जयसिंहपुर्वा के सामने हाईवे जाम कर प्रदर्शन किया। इस दौरान गुस्साए
पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने केंद्र व प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर
नारेबाजी की। बाद में एसडीएम के आश्वासन के बाद किसानों ने जाम खोल दिया।
इस
दौरान भाकियू जिलाध्यक्ष शमीम सिद्दीकी ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक
ज्ञापन एसडीएम को देकर समस्याओं के निराकरण की मांग रखी। किसान यूनियन के
जिलाध्यक्ष सिद्दीकी के नेतृत्व में सैकड़ों किसानों ने लाठी-डंडों से लैस
होकर हाईवे पर जाम लगा दिया।
इस दौरान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए
जिलाध्यक्ष ने कहा कि किसानों की मांग के बावजूद केंद्र सरकार ने अभी तक
कृषि आयोग का गठन नहीं किया है, जिससे किसानों की हालत में सुधार नहीं आ
रहा है। कहा कि धान निर्यात पर लगाई गई रोक को तत्काल हटाने की मांग रखी
गई।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में सर्वाधिक आलू का उत्पादन होता है पर उसका
उचित मूल्य किसानों को नहीं मिल रहा है। आलू का निर्यात किए जाने की भी
मांग रखते हुए गन्ने का मूल्य बढ़ाए जाने की मांग की गई। इसके अलावा
सैकड़ों किसानों को सूखा राहत व ओलावृष्टि की चेकें अभी तक नहीं मिली हैं।
जिलाध्यक्ष का आरोप है कि झुलसा रोग लगने से आलू की फसल का भी काफी हिस्सा
बर्बाद हो गया है। इसका भी सर्वे कराकर किसानों को मुआवजा दिया जाए।
क्रेडिट कार्ड के नाम पर बैंकों में हो रही अवैध वसूली को रोका जाए। उधर,
हाईवे जाम की सूचना पाकर एसडीएम छिबरामऊ महेश चंद्र दीक्षित, कोतवाली
प्रभारी संतोष व्यास के साथ मौके पर पहुंचे और किसानों को समझा-बुझाकर जाम
खुलवाया।
जिलाध्यक्ष ने 10 सूत्री मांगों का एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। इस
दौरान सुधाकर दुबे, संतोष तिवारी, अल्ला रक्खा, रामकुमार दुबे, सुरेश
यादव, माधुरी, वंदना, कुसुमा, पार्वती और राजरानी समेत सैकड़ों किसान मौजूद
थे।