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Kannauj News: लाखों रुपये की दवाएं गोदाम में पड़े-पड़े खराब, चाैराहे पर फेंकी

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कन्नौज। कोरोना संकट काल में जब लोग जिंदगी बचाने की जद्दोजहद कर रहे थे, तब जीवनरक्षक दवा शहर के पास नेरा गांव में दम तोड़ रही थीं। गाजियाबाद से भेजी गईं लाखों रुपये की दवा स्वास्थ्य विभाग ने ट्रांसपोर्टर की गोदाम से उठवाईं ही नहीं। इसका नतीजा यह हुआ कि दवा गोदाम में ही एक्सपायर्ड हो गईं। दीपावली पर जब ट्रांसपोर्टर ने गोदाम की सफाई कराई तो दवाओं को पाल चौराहा के समीप फिंकवा दिया। रात में जलाने की कोशिश की। पुलिस ने जब ट्रांसपोर्टर को पकड़ा तो रविवार को मामले का खुलासा हुआ।
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वर्ष 2020-21 में जब लॉकडाउन लगा तो दूसरी लहर में हजारों लोगों की जिंदगी कोरोना ने निगल ली। लोग उस समय जीवन रक्षक दवा और ऑक्सीजन के लिए दर-दर भटक रहे थे। उस समय जिंदगी बचाने वाली ये दवाइयां नेरा गांव में बने ट्रांसपोर्टर के गोदाम में पड़ी थीं। स्वास्थ्य विभाग ने इन दवाओं को उठवाने की जहमत नहीं उठाई। परिणाम यह हुआ कि वे एक्सपायर्ड हो गईं। 15 अक्तूबर को शहर के पाल चौराहा में भारी मात्रा में दवा फेंकी गईं और जलाने की कोशिश की गई। वीडियो वायरल हुआ तो पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। गोदाम के अंदर भारी मात्रा में एक्सपायर्ड दवा मिली। कई कार्टून पूरी तरह सड़ चुके थे, जबकि कुछ पर जलाने के निशान भी मिले।
ये दवा कोविड-19 महामारी के चरम दौर में जिले के सरकारी अस्पतालों के लिए गाजियाबाद से भेजी गई थीं। ट्रांसपोर्ट मालिक की मानें तो उसने कई बार स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी थी कि दवा लंबे समय से गोदाम में रखी हैं, फिर भी जिम्मेदार अधिकारी देखने तक नहीं आए। बात आई गई हो गई और दवाएं वहीं पड़ी रहीं। अभी जब ट्रांसपोर्टर को गोदाम खाली करना पड़ा, तब मकान मालिक ने अंदर रखे बक्सों के बारे में पूछा, तो पता चला कि वे दवा हैं। पुलिस जांच में पुष्टि हुई कि यह दवा ट्रांसपोर्ट गोदाम से ही फेंकी गई थीं। पुलिस ने पूछताछ के बाद ट्रांसपोर्टर को छोड़ दिया है। सदर कोतवाल जितेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कोई तहरीर नहीं दी गई, जिससे रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई है। कानपुर मंडल के संयुक्त निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. डीके मिश्रा का कहना है कि यह गंभीर मामला है, जिसकी जांच करवाई जा रही है। लापरवाही किस स्तर से हुई, इसकी भी पड़ताल की जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि दवा कहां की हैं। इसमें जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी।
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स्वास्थ्य विभाग का दावा, मामले की जांच हो रही
डिप्टी सीएमओ डॉ. अजहर सिद्दीकी ने बताया कि उन्होंने ट्रांसपोर्टर के गोदाम में जाकर जांच की तो वहां दवा मिली हैं, जो पांच साल पुरानी हैं। ट्रांसपोर्टर ने दवा की कोई भी बिल्टी नहीं उपलब्ध कराई है। स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में दवा का कोई भी साक्ष्य नहीं मिल पा रहा है। मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। इसमें जो भी दोषी होगा, उस पर कार्रवाई होगी। सीएमओ डॉ. स्वदेश गुप्ता ने फोन नहीं उठाया।
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