कन्नौज। तिर्वा के राजकीय मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टर अवधेश कुमार के बर्खास्त होने के बाद रेफर का खेल कर रहे डॉक्टरों में हड़कंप है। शिकायतें थीं कि डॉक्टर अवधेश यहां आने वाले मरीजों को बिना सीनियर की सलाह लिए ही चहेते अस्पताल में बेच (रेफर कर)देता था। इसके एवज में उसे मोटा कमीशन मिलता था। बताया जा रहा है डॉक्टर सबसे ज्यादा कानपुर के एक निजी अस्पताल में ही मरीजों को रेफर करता था।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मार्तोलिया ने 18 अप्रैल को जूनियर डॉक्टर अवधेश कुमार को बर्खास्त कर दिया है। काफी दिनों से यहां जूनियर डॉक्टर अवधेश की शिकायतें हो रहीं थीं। आरोप लग रहे थे कि आए दिन मरीजों को बाहर की दवाएं लिखना, चहेते अस्पतालों में इलाज कराने के लिए भेजना, समय से ओपीडी और आपातकालीन वार्ड में न पहुंचना और बिना सीनियर डॉक्टरों की सलाह लिए कानपुर सहित दूसरे अस्पतालों के लिए मरीजों को रेफर कर रहे थे। इसके एवज में डॉक्टर को मोटा कमीशन मिलता रहा था। इसके लिए कई बार डॉ. अवधेश को कॉलेज प्रबंधतंत्र की ओर से हिदायतें भी दी गईं, वे नहीं मानें। जूनियर डॉक्टर की शिकायत जब शासन स्तर पर हुई तब मामले की जांच हुई। शिकायतें सही निकलीं। इसके बाद प्राचार्य ने जूनियर डॉक्टर को बर्खास्त कर दिया। करीब सात महीने ही मेडिकल कॉलेज में नौकरी कर सका।
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मर्तोलिया का कहना है कि हम लोगों की सेवा करने के लिए यहां बैठे हैं, जो भी अनुशासनहीनता करेगा, उस पर कार्रवाई की जाएगी।
जहां की पढ़ाई, वहीं पाई तैनाती
बताया गया है कि डॉ. अवधेश ने राजकीय मेडिकल कॉलेज में ही एमबीबीएस की पढ़ाई की है। अक्तूबर 2021 में जूनियर डॉक्टर पद पर उसकी तैनाती हो गई थी। इन दिनों आपातकालीन कक्ष में ड्यूटी लगाई गई थी। सीनियर डॉक्टरों की सलाह लिए बगैर ही मरीज को रेफर करने का मामला तूल पकड़ गया और यह कार्रवाई हुई।
बड़े नेताओं तक पहुंचा मामला
ज्यादातर जो मरीज राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचते हैं, उसका संपर्क नेताओं से भी रहता है। कई मरीजों के परिजनों ने जानकारी कुछ बड़े नेताओं को दी। इसके बाद जांच कराई कराई गई, तब कहीं जाकर बर्खास्तगी की कार्रवाई हुई।
तीन स्वास्थ्य कर्मियों में कार्रवाई का डर
बर्खास्त किए गए जूनियर डॉक्टर के मददगार तीन स्वास्थ्य कर्मियों को भी नोटिस मिला है। इससे इन कर्मचारियों को कार्रवाई का डर सता रहा है। इन कर्मचारियों को सात दिन के अंदर जवाब देना है। हालांकि इतना सब होने के बाद भी कॉलेज प्रशासन इन कर्मचारियों के नाम बताने में आनाकानी कर रहा है।