जिला अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ को एनएवीएच के तहत
दिए गए प्रशिक्षण में लावारिस व्यक्ति और जिस व्यक्ति की भाषा समझ में न
आती हो को उपचार व देखभाल के तरीके बताए गए।
मंगलवार को जिला अस्पताल
में प्रशिक्षण देते हुए डाक्टर फैसल ने डाक्टरों, स्टाफ नर्सों,
फार्मेसिस्टों और वार्ड ब्वाय को बताया कि यदि कोई व्यक्ति बेहोशी की हालत
में अस्पताल में भर्ती हुआ हो और उसके फेफड़े काम न कर रहे हों तो फेफड़ों
को पंप कैसे देना चाहिए, जिससे मरीज को लाभ मिल सके।
अस्पताल में फैले
इंफेक्शन को समाप्त करने के तरीके बताए गए। कहा गया कि मरीज की देखभाल करते
समय मुंह को बंद रखें। हाथों में ग्लब्स पहनकर ही उपचार दें। ग्लब्स पहने
हुए हाथों से अन्य मरीजों या अन्य स्टाफ को न छुएं और अस्पताल में दवा आदि
का छिड़काव कराते रहें, जिससे इंफेक्शन फैलने की संभावना पैदा न हो।
कहा
कि अस्पताल में यदि कोई लावारिस मरीज भर्ती हुआ है और देखरेख करने वाला
कोई नहीं है तो यहां पर स्टाफ की जिम्मेदारी बनती है कि मरीज का पूरा सहयोग
कर बेहतर उपचार दें। उसकी देखरेख करें, जिससे मरीज ठीक हो सके।
कहा कि
अस्पताल में यदि कोई बाहरी देश या प्रांत का पर्यटक बीमार होकर भर्ती होता
है और भाषा को स्टाफ नहीं समझ पाता है तो इस दशा में क्या करना चाहिए, के
बारे में भी जानकारी दी। इस मौके पर जिला अस्पताल के अधीक्षक डा. सीपी
सिंह, हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. यूसी चतुर्वेदी, स्टाफ नर्स ज्योति सिंह,
गिलोरिया वर्मा, प्रियंका आदि मौजूद थे।