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मक्का का रकबा घटा, मूंगफली का बढ़ा

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खेत में खड़ी मक्का की फसल। - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज। जायद में बोई जाने वाली फसलों में मक्का का रकबा घटा है। इस बार मूंगफली का बढ़ गया। मक्का का रकबा लंबे समय बाद करीब छह हजार हेक्टेयर घटा है।
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किसानों ने मक्का की जगह इस बार सब्जियाें, मूंगफली और हरे चारा को तवज्जो दी। किसानों का कहना है कि मक्का की फसल कम करने की वजह दो साल से सूड़ी कीट की समस्या है। वहीं कोविड-19 के तहत लॉकडाउन से खपत भी कम हुई है। पिछले साल रेट 1200 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ठहरा रहा। इससे इस बार किसानों ने दूसरी फसलें की हैं। जायद में मक्का की 33 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुआई की गई है। पिछले साल 39 हजार हेक्टेयर में मक्का बोया गया था।
ताहपुर निवासी वीरेंद्र, जरौरा निवासी तेजराम, पुखरावां निवासी कुलदीप, अमोलर निवासी ओमशंकर ने कहा कि पिछले साल लॉकडाउन के चलते मक्का में काफी नुकसान हुआ। तमाम किसानों की लागत भी सीधी नहीं हो पाई। काफी फसल खेत में सूड़ी लगने से बर्बाद हो गई। फसल तैयार हुई तो वाजिब दाम नहीं मिले। साल 2019 में किसानों को करीब 2200 रुपये क्विंटल तक भाव मिला था।
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किसानों के मुताबिक इस बार भी कोरोना का संक्रमण तेज है। लॉकडाउन की आशंका है। ऐसे में महंगे रेट पर मक्का खरीदने वाली तमाम कंपनियां बंद हो जाएंगी। सही दाम नहीं मिलेंगे। इससे किसानों ने इस बार रकबा घटा दिया।
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वहीं मूंगफली का रकबा 2615 से बढ़कर 3000 हेक्टेयर पहुंच गया है। हरा चारा पिछली बार की तुलना में 550 की जगह 800 हेक्टेयर में बोया गया। पिछली बार 2615 हेक्टेयर में सब्जियों की खेती की गई थी। इस बार तीन हजार हेक्टेयर में बोई गईं। उर्द पिछली बार 2050 हेक्टेयर में बोई गई थी। इस बार 2152 हेक्टेयर में बोई गई। मूंग की बुआई इस बार 1880 की जगह 1972 हेक्टेयर में हुई है।
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