हसेरन विकास खंड की तीन न्याय पंचायतों को परंपरागत खेती विकास योजना में शामिल किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों पर किसानों की निर्भरता खत्म करना है। ढाई हजार एकड़ में जैविक खेती कराई जा रही है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने परंपरागत खेती विकास योजना के पहले चरण में हसेरन विकास खंड की न्याय पंचायत तरींद, अरुहो, सकतपुर की ढाई हजार एकड़ जमीन चिह्नित की है। तरींद में 20, अरुहो में 18, सकतपुर में 12 क्लस्टर बनाए गए हैं। एक क्लस्टर पर 14 लाख 50 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। पहले वर्ष में छह लाख अस्सी हजार, दूसरे वर्ष में चार लाख 81 हजार और तीसरे वर्ष में दो लाख 72 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसका खर्च किसानों को जैविक खेती के बारे में बताने के लिए बैठक, एक्सपोजर विजिट, ट्रेनिंग, आन-लाइन रजिस्ट्रेशन, मृदा परीक्षण, आर्गेनिक खेती व नर्सरी की जानकारी, आदि पर किया जाएगा। इसके अलावा जैविक खेती से पैदा होने वाले उत्पादन की पैकिंग व ट्रांसपोर्टेशन के लिए अनुदान दिया जाएगा।
उप कृषि निदेशक डा. राजेश कुमार ने बताया कि जिले में जलपाईगुड़ी विवेकानंद एजूकेशन सोसाइटी को लगाया गया है। किसानों को काफी पहले तीन दिवसीय ट्रेनिंग कराई जा चुकी है। जिसमें कृषि विशेषज्ञों ने भूमि की घट रही उर्वरा शक्ति के बारे में उनको जागरूक किया है। उनको पुराने बीज से खेती करने की सलाह दी गई। किसानों की डिमांड पर पुराने बीज के लिए पांच सौ रुपये प्रति एकड़, जैविक फास्फेट (प्राम) तैयार करने के लिए एक हजार रुपये प्रति एकड़, जैविक कल्चर के लिए पांच रुपये प्रति एकड़, वर्मी बेड के लिए पांच हजार रुपये प्रति एकड़ दिया जा चुका है। इसके अलावा किसानों की ओर से जो भी डिमांड आएगी वह खातों में भेज दी जाएगी। प्रति क्लस्टर नमूने लिए जा चुके हैं। 1050 किसानों की भूमि के नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का किसानों को मिलेगा फायदा
उप कृषि निदेशक ने बताया कि बाजार में हाईब्रिड आ जाने से देशी नाम ही गायब हो रहा है। हाईब्रिड सब्जियों के खाने से लोग विभिन्न तरह के रोगों सहित मोटापा से ग्रसित हो रहे हैं। इन तमाम चीजों से जैविक खेती के उत्पादन से राहत मिलेगी। जैविक खेती में उत्पादन कुछ कम मिलता है, लेकिन इसका बाजार भाव हाईब्रिड की तुलना में काफी अधिक रहता है। कन्नौज के किसानों को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का काफी फायदा मिलेगा। इस रूट के जरिए वह दिल्ली, आगरा सहित देश की विभिन्न मंडियों में फसल आसानी के साथ भेज सकेंगे।