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Kannauj News: इत्रनगरी से 550 मीट्रिक टन आलू खरीदेगी मध्य प्रदेश व ओडिशा सरकार

Tue, 21 Apr 2026 12:24 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
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कन्नौज। केंद्र सरकार की ओर से 20 लाख टन आलू खरीद की घोषणा के बाद अब राज्य सरकारें भी इस दिशा में आगे आईं हैं। जिले से 550 मीट्रिक टन आलू मध्य प्रदेश व ओडिशा सरकार भी खरीदेगी। इसके लिए उद्यान विभाग ने प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। इसके साथ ही बाजार हस्तक्षेप योजना भी जल्द शुरू होगी, जिसके तहत जिले में 16 आलू क्रय केंद्र बनाए जाएंगे, जहां गेहूं व धान की तरह आलू की सरकारी खरीद की जाएगी। इसके लिए 6500 रुपये प्रति टन का भाव निर्धारित किया गया है।
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इत्रनगरी सिर्फ खुशबू के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी उपजाऊ मिट्टी और शानदार आलू की पैदावार के लिए भी जानी जाती है। इस बार जिले में 56 हजार हेक्टेयर में आलू की बंपर पैदावार हुई है, मगर भाव सही न मिलने पर किसानाें ने इसे कोल्ड स्टोरेज में भंडारित कर दिया तो कई लोगों ने औने-पौने दामों में बेच दिया। तालग्राम क्षेत्र के रोहली, बिरौली, मधई नगला, अंदौआ, तिसौली व पिड़ारीखेड़ा समेत कई गांवों के किसानों ने छायादार स्थानों पर आलू के ढेर लगा दिए।
मध्य प्रदेश सरकार ने श्रीनाथ किस्म के आलू पर ही भरोसा जताया है, जो तालग्राम क्षेत्र में सबसे अधिक उत्पादित हुआ है। इसी तरह ओडिशा सरकार ने चिप्सोना व ख्याति किस्म के आलू की मांग की है। दोनों प्रदेशों से करीब 550 मीट्रिक टन आलू की डिमांड आई है, जिस पर उद्यान विभाग ने निर्यात की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने इसके लिए 6500 रुपये प्रति टन (यानी 650 रुपये प्रति क्विंटल) का भाव निर्धारित किया है। यह कदम बाजार में आलू की गिरती कीमतों को रोकने और किसानों को न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
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जिले में खुलेंगे 16 क्रय केंद्र, गेहूं-धान की तर्ज पर होगी खरीद
किसानों को बिचौलियों के चक्कर से बचाने के लिए प्रशासन बाजार हस्तक्षेप योजना को जमीन पर उतारने की तैयारी में है। जिले में कुल 16 आलू क्रय केंद्र बनाए जाएंगे। ठीक वैसे ही जैसे गेहूं और धान की सरकारी तौल होती है, अब आलू किसान भी इन केंद्रों पर जाकर अपनी फसल बेच सकेंगे। उद्यान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही खरीद की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर शुरू कर दी जाएगी। कोल्ड स्टोरेज में आलू डंप कर रहे किसानों के लिए यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं है। अब उन्हें इस बात की चिंता नहीं होगी कि आलू सड़ जाएगा या उन्हें औने-पौने दामों पर बेचना पड़ेगा।





देर से जागी सरकार
तिसौली गांव के किसान सर्वेश वर्मा ने बताया कि आलू को लेकर सरकार गंभीर नहीं थी। यदि पहले चेत जाती तो आलू की यह दशा नहीं होती। सरकार ने देर से निर्णय लिया तो इससे उन किसानों को फायदा होगा, जिन्होंने आलू का ढेर छायादार जगह पर लगा लिया है। कोल्ड स्टोरेज में जो आलू है, उसका भाड़ा भी देना पड़ेगा।
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कच्ची सीजन में करे व्यवस्था
तिसौली गांव के ही पंकज प्रजापति ने बताया कि सरकार को आलू खरीद की व्यवस्था कच्ची सीजन में ही करनी चाहिए। कच्चे आलू की खोदाई जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी के प्रथम सप्ताह में होने लगती है। जिन किसानों के पास रकबा कम है, वह आलू खोदकर मक्का की बोआई करते हैं। ऐसे में सरकार को फरवरी से ही आलू की खरीद शुरू करनी चाहिए।


मध्यप्रदेश व ओडिशा सरकार से 550 मीट्रिक टन आलू की डिमांड आई है। जिले में आलू का बंपर उत्पादन हुआ है, इसलिए आलू की कोई कमी नहीं होगी। तालग्राम में मध्य प्रदेश के ग्वालियर, भिंड, मुरैना समेत कई जगहों के व्यापारियों ने डेरा डाल लिया है। बाजार हस्तक्षेप योजना भी जिले में जल्द शुरू ही जाएगी।
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-चंद्रप्रकाश अवस्थी, जिला उद्यान अधिकारी

जिले में आलू की स्थिति पर एक नजर
आलू का रकबा 56,000 हेक्टेयर
उत्पादन 20.10 लाख मीट्रिक टन
शीतगृहों की संख्या 197 कोल्ड स्टोर
भंडारण क्षमता 21.82 लाख मीट्रिक टन
भंडारित मात्रा 10.29 लाख मीट्रिक टन
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