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तलहटी पर पहुंचा निचली गंग नहर का पानी, फसलों पर संकट

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उदैयापुर गांव के सामने से निकली निचली गंग नहर - फोटो : KANNAUJ
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कन्नौज/इंदरगढ़। नहर विभाग की लापरवाही किसानों पर भारी पड़ रही है। हसेरन में कलसुआ गांव से कटैया पुल तक नहर पटरी को पक्का करने का धीमी गति से चल रहे काम के कारण निचली गंग नहर का पानी रोक दिया गया है। नहर में पानी तलहटी पर है और किसानों को नहीं मिल पा रहा है। नहर के किनारे खेतों में लगी आलू, चना और राई की फसलों को पर्याप्त पानी न मिलने से इनके सूखने का खतरा बढ़ गया है। सक्षम किसान तो ट्यूबवेल से पानी ले रहे हैं लेकिन ज्यादातर किसान ऐसा करने में असमर्थ हैं। गेहूं की फसल के लिए भी खेत तैयार नहीं हो पा रहे हैं। किसानों ने नहर में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
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निचली गंग नहर मैनपुरी से होते हुए कानपुर नगर के पनकी तक जाती है। इसकी करीब आधा दर्जन शाखाएं भी हैं। जो पानी न होने के कारण सूख गई हैं। दो शाखाएं औरैया से भी जुड़ी हैं। नहर के किनारे स्थित कंसुआ, हसेरन, बरौली, उदइयापुर, कछपुरा, कटैया, बहोसी, रावतपुर, कल्यानपुर, उमर्दा, खैरनगर समेत करीब 100 गांव आते हैं। जहां के खेतों को इसी नहर से पानी मिलता है। इनके अलावा कलसुआ से भिकनीपुरवा, जमुनियापुर से खनियापुर, अगौस से बेलामऊ सरैया, कलसान से बरसाती डेरा, कटैया से त्यौर और सकतपुर से सरगौली होते हुए औरैया के धरमंगदपुर तक इसकी शाखाएं फैली हैं। जो पानी न होने के कारण सूखी पड़ी हैं।
करीब डेढ़ महीने पहले नहर विभाग की ओर से निचली गंग के पटरी को पक्का करने के लिए हसेरन में कलसुआ गांव से कटैया पुल के बीच काम शुरू कराया गया था। काम शुरू होने से पहले ही नहर के पानी को रोक दिया गया था। पानी रुकने के बाद करीब सौ गांवों के किसानों के सामने सिंचाई का संकट खड़ा हो गया। कुछ किसान तो ट्यूबवेल से पानी लेकर सिंचाई कर रहे हैं लेकिन ज्यादातर ऐसा करने में सक्षम नहीं है। इनकी आलू, राई और चना की फसलें सूखने की कगार पर हैं। किसानों ने जिलाधिकारी रवींद्र कुमार से समस्या दूर कराने की मांग की है।
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इससे पहले सिंचाई विभाग की लापरवाही से करीब एक सैकड़ा किसानों की पांच हजार बीघा फसल सूखने की कगार पर पहुंच गई थी। खड़िनी में निचली गंग नहर से निकले कंसुआ-भिखनीपुर्वा रहवाहा में 22 जून की रात कलसान नई बस्ती के पास खांदी कट गई थी। इससे करीब एक सैकड़ा किसानों की हजारों बीघा मक्का की फसल जलमग्न हो गई थी। किसानों की शिकायत के बाद सिंचाई विभाग ने माइनर के पानी को बंद कर दिया था। 10 दिन बीतने के बाद भी सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने खांदी की मरम्मत और पानी छोड़ने की सुध नहीं ली। इससे करीब सौ गांवों के किसानों की पांच हजार बीघा से अधिक मूंग, उरद और मूंगफली की फसल सूखने लगी थीं। नई बस्ती, अनंतपुर, गुदारा के किसानों ने प्रदर्शन भी किया था। इसके बाद डीएम की फटकार के बाद खांदी की मरम्मत कराकर पानी छोड़ा गया था।
फतवापुर गांव के किसान शिव सिंह ने बताया कि पटरी के काम इतनी धीमी गति से किया जा रहा है कि अभी इसमें एक माह से ज्यादा का वक्त लग जाएगा। ऐसे में उनकी फसल तो पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। फतवापुर के किसान अमर सिंह ने का कहना है कि बार-बार उन लोगों के सामने समस्या खड़ी होती है। कभी पानी न नहीं होता तो कभी नहर कटने से समस्या आ जाती है। अधिकारी भी ध्यान नहीं देते। गोंदारा गांव के किसान महेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि अगर एक हफ्ता और पानी फसल को नहीं मिला तो वह पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। हर किसान के पास इतना पैसा नहीं है कि वह ट्यूबवेल से पानी लेकर सिंचाई कर सके। फतवापुर गांव के किसान जय सिंह ने बताया कि अधिकारी नहर पर काम तो शुरू करा देते हैं लेकिन देखरेख नहीं करते। यही कारण है कि ठेकेदार मनमानी से काम करता है और समस्या किसानों के खड़ी कर देता है।
नहर विभाग से पूरे मामले की जानकारी ली जाएगी। पता किया जाएगा कि आखिर नहर का पानी इतने दिनों से क्यों रोके रखा गया है। किसानों को किसी भी दशा में समस्या नहीं आने दी जाएगी। जल्द समस्या का निराकरण कराया जाएगा।
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-रवींद्र कुमार, जिलधिकारी।
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