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Kannauj News: पिता की हत्या में बेटे और भतीजे को उम्र कैद

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कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे में अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर बेटे ने अपने चचेरे भाई के साथ मिलकर पिता की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) ने दोनों को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाते हुए 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार अनौगी भेज दिया गया है।
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जानकारी के मुताबिक सौरिख थाना क्षेत्र के ग्राम मिश्राबाद में 11 फरवरी 2015 की रात 12.15 बजे मथुरा प्रसाद की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनके भतीजे नजर सिंह ने मथुरा प्रसाद के पुत्र जबर सिंह व चचेरे भाई महताब सिंह के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। वादी के मुताबिक मथुरा प्रसाद उसके पास रहते थे और उनकी पत्नी कहीं चलीं गईं थीं। जबर सिंह अपने पिता से अलग रहता था। आपराधिक किस्म का होने के कारण वह कोई ताल्लुक नहीं रखते थे। मथुरा प्रसाद के पास 28 बीघा जमीन थी और एक्सप्रेवे में कुछ जमीन अधिग्रहीत होने के कारण उसका मुआवजा भी मिला था।
रात में जबर सिंह व महताब सिंह छत से उतरकर नीचे आए और अपने पिता से मुआवजे की रकम मांगने लगे। जब उन्होंने मना किया तो दोनों ने तमंचे से गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। मामले की विवेचना करते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष अरविंद मोहन जायसवाल ने दोनों को खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की तरफ से नौ गवाह पेश किए गये। शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) हरेंद्रनाथ ने जबर सिंह व महताब सिंह को दोषी करार देते हुए घर में घुसकर मारपीट में तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास व दो - दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। वहीं, गोली मारकर हत्या करने में आजीवन कारावास तथा 10-10 हजार रुपये अर्थदंड लगाया है। इसके अलावा जबर सिंह को तमंचा रखने के आरोप में आर्म्स एक्ट के तहत दो वर्ष का सश्रम कारावास व एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माने की रकम अदा न करने पर एक - एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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महताब को जानलेवा हमले में भी 10 साल की सजा

अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी द्वितीय) हरेंद्र नाथ ने ग्राम मिश्राबाद निवासी महताब सिंह को जानलेवा हमले में भी 10 साल की सजा सुनाई है। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि 30 दिसंबर 2011 को गीता देवी पत्नी नजर सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें बताया गया था कि उनके चचिया ससुर मथुरा प्रसाद को रास्ते में घेर कर महताब सिंह ने तमंचे से फायर कर दिया। जिसमें वह बाल- बाल बच गए थे। इस मामले में भी महताब को 10 वर्ष सश्रम कारावास एवं पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।






गैंगस्टर ने स्वीकार किया जुर्म, दो साल की सजा

कन्नौज। शासकीय अधिवक्ता सुधीर कुमार पांडेय ने बताया कि 27 जून 2022 को तिर्वा कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक रामअवतार ने गैंगलीडर दिनेश प्रजापति, प्रदुम सोनकर उर्फ सत्यम व अनिल कुशवाहा के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। यह तीनों चोरी सहित विभिन्न अपराधों में जेल गए थे, तब से जिला कारागार में बंद हैं। इसमें जनपद कानपुर के थाना घाटमपुर अंतर्गत ग्राम रहमपुर निवासी अनिल कुशवाहा पुत्र किशोरी लाल ने कोर्ट में हाजिर होकर अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) नंदकुमार ने अनिल को जेल में बिताई गई अवधि दो वर्ष तथा पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
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