अपनी नाबालिग पुत्रियों की हत्या कर शव मक्का के खेत में फेंकने वाले पिता को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 25 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर 6 माह अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी।
शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे ने बताया कि घटना 9 जून 2012 की है। तिर्वा थाना क्षेत्र के गांव सुजानसराय निवासी गुड्डू उर्फ हसीब खां पुत्र इकरार खां घटना के दिन सुबह 7 बजे अपनी 6 वर्षीय पुत्री सबा परवीन और 9 वर्षीय खुशनुमा को घुमाने के बहाने घर से लेकर चला। गांव से करीब एक किमी दूर रास्ते में उसने दोनों पुत्रियों के हाथ-पैर बांधकर सिर में वसूली मारकर हत्या कर दी।
दोनों के शवों को मक्का के खेत में फेंक दिया। खेत से निकलते हुए राहगीरों ने उसे देखा और टोका तो वह फरार हो गया। शक होने पर ग्रामीण जब मक्का के खेत में घुसे तो दोनों नाबालिग लड़कियों के शव पड़े मिले। सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने शवों का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। परिजनों ने जब गुड्डू उर्फ हसीब से घटना के बारे में पूछताछ की तो वह मौके से फरार हो गया।
इस पर अभियुक्त के चाचा जमींदार उर्फ जरार खां पुत्र समीउद्दीन ने तिर्वा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पूछताछ में अभियुक्त ने पुलिस को बताया कि वह राजमिस्त्री का काम करता है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। जवान होती दो बेटियों की शादी की चिंता सता रही थी।
इसी के चलते उनके घटना को अंजाम दिया। तत्कालीन तिर्वा कोतवाली प्रभारी खुर्शीद अहमद ने मामले की विवेचना कर अभियुक्त के खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। बुधवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के न्यायाधीश सूर्य प्रकाश शर्मा ने साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर गुड्डू उर्फ हसीब खां को नाबालिग पुत्रियों की हत्या का दोषी मानते हुए सजा सुनाई।