इत्र नगरी में अबकी दीपावली पर रौनक कम है। बवाल प्रभावित कई मुहल्लों में
गत वर्ष के मुकाबले इस बार दीवाली फीकी नजर आई। सड़कों पर भी त्योहार के
बावजूद भरपूर जोश और जश्न का माहौल नहीं दिखा।
दुर्गा
विसर्जन यात्रा के दौरान लाखन तिराहे पर रंग डालने को लेकर हुए विवाद के
बाद फायरिंग हो गई थी। इसमें महेश कुशवाहा की मौत हो गई थी जबकि एक युवक
घायल हो गया था। इसके बाद भड़के दंगा ने चौतरफा नुकसान पहुंचाया है। दिवाली
भी इससे अछूती नहीं रही।
एक ओर जहां दंगे के दंश ने मार्केट से भीड़ कम
करके व्यापारियों की कमाई पर प्रहार किया वहीं दूसरी तरफ युवाओं को घरों के
अंदर ही ज्यादातर समय बिताने के लिए विवश कर दिया है। परिवार के लोगों को
डर है कि यदि नौजवान घर से बाहर निकले तो वे कानून के फंदे में फंस सकते
हैं।
पठकाना, हरदेवगंज, अजयपाल, व कटरा मुहल्ले में इस बार चहल कदमी न के
बराबर दिखी। पटाखों की गूंज व आतिशबाजी की धमाचौकड़ी भी कम ही सुनाई दी।