सदर कोतवाली क्षेत्र के कुतलूपुर में तीन मासूमों समेत चार मौतों का गम गांव में दूसरे दिन साफ दिखाई दिया। घरों के बाहर लोग गुमसुम बैठे रहे। बच्चों के शोर से गूंजने वाली गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। केवल गांव में खूंटे से बंधे जानवरों की जंजीर व खुरों की आवाज आती रही। वहीं तीन अन्य लोग अस्पताल में जिंदगी से जूझ रहे है।
रविवार को गांव की कविता, रेशमा, खुशी, शेरू की टीला धंसने से मौत हो गई थी। हादसे के दूसरे दिन गांव में मातम छाया रहा। घरों में चूल्हे तक नहीं जले। वहीं गांव के परिषदीय स्कूलों में बच्चों की संख्या कम रही। मालूम हो कि कुतलूपुर गांव के सात लोग टीला धंसने से दब गए थे। जिसमें जिसमें कविता, रेशमा, खुशी व शेरू को अस्पताल के डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था। वहीं शीतल, कशिश, शिवकांती की हालत गंभीर बनी हुई है।
रविवार की देर शाम जैसे ही सभी शव गांव पहुंचे कोहराम मच गया। शवों को देखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में भीड़ उमड़ी। हादसे से दहशतजदा शिवकांती व शीतल के घर में पिछले 48 घंटे से चूल्हा नहीं जला है। घर के दरवाजे सारी रात खुले रहे। हाईस्कूल की छात्रा शीतल के पिता दिनेश ने बताया कि उनकी पुत्री की जान बच गई है, लेकिन गांव में मातम है। गांव से चार मौत होने से कई घरों में चूल्हा नहीं जला है।
स्कूलों में शोक संवेदना व्यक्त की गई
कन्नौज। कुतलूपुर गांव में तीन छात्रों की मौत पर सोमवार को स्कूलों में शोक व्यक्त किया गया। खुशी की मौत से गोमती देवी गर्ल्स इंटर कालेज मकरंद नगर में दो मिनट का मौन रखा गया। इसी प्रकार शेरू की मौत पर परिषदीय स्कूल में दो मिनट का मौन रखा गया।
कोई नहीं गया मिट्टी खोदने
कन्नौज। रविवार को हादसे के बाद कांशीराम कालोनी के पीछे सन्नाटा रहा। रोजाना इसी स्थान पर कालोनी के बच्चे क्रिकेट खेलते थे। रविवार को हुए हादसे से सभी डरे हैं। सोमवार सुबह से टीला के निकट सन्नाटा रहा। यहां कालोनी का कोई बच्चा खेलता नजर नहीं आया। वहीं टीले पर मिट्टी की खुदाई पूरी तरह से बंद है। कांशीराम कालोनी की आरजू, प्रीति, विमल व गोविंद ने बताया कि यहां रोज बच्चे खेलते है। आज मां-बाप ने बच्चों को खेलने के लिए नहीं भेजा है।