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कुपोषण से जंग में सहजन बनेगा ढाल

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कन्नौज। कुपोषण से जंग में शासन सहजन को ढाल बनाने जा रहा है। इसके औषधीय गुणों को देखते हुए वन विभाग और स्वास्थ्य महकमे को हर गर्भवती महिला से पांच पौधे लगवाने के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अलावा जिन घरों में कुपोषित बच्चे हैं, वहां भी यह पौधे रोपे जाएंगे। सहजन के फल-फूल और पत्तियों में भरपूर पोषण आहार होता है। आयुर्वेद के अनुसार इसके सेवन से 300 बीमारियां दूर होती हैं।
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शासन और प्रशासन के तमाम प्रयासों के बाद भी कुपोषण दूर नहीं हो रहा है। हर साल जिले में करीब 1800 बच्चे अतिकुपोषित और 10 हजार से अधिक कुपोषित बच्चे सामने आ जाते हैं। इससे शासन के निर्देश पर वन और स्वास्थ्य विभाग ने सहजन के सहारे कुपोषण से जंग जीतने की योजना बनाई है। वन विभाग ने 65 हजार सहजन के पौधों का इंतजाम किया है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिह्नित 11137 गर्भवती महिलाएं 15 अगस्त से एक माह तक सहजन के पांच से 10 पौधे लगाएंगी। यह पौधा छह महीने में ही बड़ा आकार लेकर फूल और फल देने लगेगा। कुपोषित बच्चों के परिजनों को इसकी सब्जी खाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक सहजन के पेड़ में भरपूर मात्रा में विटामिन व जरूरी पोषक तत्व होते हैं। इसके उपयोग से कुपोषण दूर किया जा सकता है। गर्भवती महिलाओं के लिए भी इसका सेवन लाभदायक माना गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग को भी हर आंगनबाड़ी केंद्र में सुरक्षित स्थान पर कम से कम दो-दो पेड़ लगाने के आदेश जारी हुए हैं। जिला वन अधिकारी मो. शफीक ने बताया कि शासन के निर्देश पर युद्धस्तर से सहजन के पौधे लगाने की तैयारियां की जा रही हैं। इससे कुपोषण के साथ-साथ पर्यावरण को भी फायदा होगा।
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सिर्फ 300 अतिकुपोषित बच्चों को मिला उपचार
वर्ष 2018 में 9424 नवजातों में 2222 बच्चों का वजन मानक से कम निकला था। इसमें 18 सौ बच्चे अतिकुपोषित पाए गए थे। 11 सौ बच्चे कुपोषित थे। इनमें से जिला अस्पताल के एनआरसी वार्ड में सिर्फ 300 अतिकुपोषित बच्चों को इलाज मुहैया कराया गया है। भर्ती कराने के लिए 15 सौ बच्चों के परिजन इधर-उधर भटकते रहे। ऐसे में सहजन का पेड़ अतिकुपोषित बच्चों के लिए उनके आंगन में वरदान साबित होगा।
पत्ती, छाल, जड़, फली...सभी फायदेमंद
सहजन को औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। आयुर्वेद के अनुसार इसमें 300 प्रकार की बीमारियों का उपचार मौजूद है। वैज्ञानिकों ने भी इसके महत्व को स्वीकार किया है। इसकी पत्ती, छाल, जड़, फली, फूल सहित सभी फायदेमंद हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि सहजन में दूध की तुलना में चार गुना कैल्शियम, दो गुना प्रोटीन, गाजर से चार गुना विटामिन ए, संतरे से सात गुना ज्यादा विटामिन सी, केले से तीन गुना पोटेशियम और दही से तीन गुना ज्यादा प्रोटीन होता है।
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