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कोरोना ने लील ली तरबूज किसानों की मेहनत, लागत तक सीधी नहीं हो रही

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तालग्राम(कन्नौज)। कोरोना संक्रमण के चलते लगे लॉकडाउन में तरबूज और खरबूजा की पैदावार करने वाले किसानों की हालत पस्त है। पिछले साल की तरह इस बार भी दाम औंधे मुंह हैं। किसानों की लागत तक सीधी नहीं हो रही है।
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पिछले साल कोरोना के चक्कर में तरबूज और खरबूजा के दाम गिरे रहे। इससे किसानों को तगड़ा नुकसान हुआ। इस बार भी यही हालात हैं। लॉकडाउन के चलते किसान तरबूज और खरबूजा को बाहरी मंडियों में नहीं भेज पा रहे हैं। इलाकाई मंडियों में भी बिक्री हो रही है। मांग से आपूर्ति ज्यादा होने से दाम ऊपर नहीं चढ़ रहे हैं। ऐसे में कई किसान खेतों में फसल पलटने की सोच रहे हैं।
इलाके के अमोलर, कैथनपुर्वा, बिचपुर्वा, बरगांव, मवैइया, चौतराहार, गदोरा, सलेमपुर, अकरमाबाद, पुखरांवा, अतरौली, मायापुर्वा, किशनपुर, तिसौली, मुसाफिरपुर, भोजापुर, सिलुआपुर समेत एक सैकड़ा से अधिक गांवों में तरबूज और खरबूजा की खूब फसल होती है। किसानों का कहना है कि इस साल फसल अच्छी हुई है। इससे मुनाफा की उम्मीद थी। लॉकडाउन ने बर्बाद कर दिया है।
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फैक्ट फाइल
एक बीघा खेत में तरबूज की फसल की लागत करीब दो हजार रुपये है।
एक बीघा खेत में 20-25 क्विंटल तरबूज का उत्पादन होता है।
मौजूदा समय 150-200 रुपये क्विंटल रेट हैं।
किसानों के मुताबिक पिछले साल 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल बिक्री हुई थी।
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