तालग्राम। स्वच्छ भारत अभियान के तहत जिले को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है। ईट भट्ठा संचालक की लापरवाही से शौचालय नहीं बने है। इससे मजदूर खेतों व मार्ग किनारे जाकर खुले में शौच कर रहे हैं। खुले में शौच मुक्त का ख्वाब अधूरा है।
त्यौर, तालग्राम, ताहपुर, शकरहनी, गोवा दानेदार, सुजानसराय, के ईंट-भट्ठों पर शौचालय नहीं बने है। इससे भट्ठों पर काम करने वाले सैकड़ों की तादाद में बिहारी मजदूर खुले में खेतों में शौच जाने को मजबूर है। पुलंदर, सकटेलाल, मटरु, लक्षमियां, सुरता समेत कई मजदूरों ने बताया कि भट्टों पर शौचालय नहीं बने। इससे खुले में शौचालय को जाना पड़ता है। पूर्व शिक्षक रामनाथ दुबे, दिलसुख सविता, सुंदरलाल, जगदीश चंद्र कनौजिया का कहना कि पंचायत विभाग के अफसर मानीटरिंग नहीं करते है। शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी पंचायत विभाग की है। वह केवल गांव-गांव जाकर शौचालयों की समीक्षा कर लेते हैं। ईट भट्ठों पर शौचालय को लेकर कोई मानीटरिंग नहीं होती है। इससे स्वच्छता की मुहिम को झटका लग रहा है। जिला प्रशासन को ईंट भट्ठा संचालकों को पत्र लिखकर शौचालय बनवाने की हिदायत देनी चाहिए।