छिबरामऊ(कन्नौज)। छिबरामऊ महोत्सव के वर्चुअल मंच पर कासगंज के कवि अजय ‘अटल’ ने चर्चित गीत ‘कंठ में करुणा है वरना, गीत गमगीन नहीं होते’ सुनाया तो सभी मंत्रमुग्ध हो गए। वहीं, डीएम ने आयोजकों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करना जरूरी है। इससे जनजुड़ाव बढ़ता है।
छिबरामऊ महोत्सव के वर्चुअल मंच पर मंगलवार को डीएम राकेश कुमार मिश्र ने कहा कि कोरोना काल में आयोजन करना बेहद चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में तकनीक का प्रयोग कर सांस्कृतिक परंपराओं का निर्वहन करने के लिए युवा बधाई के पात्र हैं। उधर, दूसरे दिन महोत्सव में युवा कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। नगर के युवा कवि विशाल समर्पित, शिवम दुबे, सौरभ कुशवाहा व युवा कवियित्री दीपमाला शाक्य ने रचनाएं सुनाकर मुग्ध कर दिया। प्रदेश के अन्य शहरों के युवा व वरिष्ठ कवियों ने भी काव्यपाठ किया।
लखनऊ के उमेश प्रकाश सक्सेना ने ‘फिर नई पतवार लेकर, हौसले मझधार लेकर तू चल, छत्तीसगढ़ के नरेंद्र मिश्र ‘धड़कन’ ने ‘तन से संवर रहे हो, मन से अवश्य संवरना’, रचनाएं सुनाईं। कवि सुरेश फक्कड़ ने ‘सरहद पर सिपाही का खून खौल रहा है, मेरे देश जनतंत्र कहां है’, शायर कलीम नूरी फिरोजाबाद ने ‘अपने वतन की करो निगरानी, हिंदू मुस्लिम बाद में पहले हिंदुस्तानी’, प्रतापगढ़ के युवा कवि आदर्श ने ‘कितनी सौगंध खाएंगे लाड़ली, सौ जन्म निभाएंगे लाड़ली’, बहराइच के नितेश दिव्य ने ‘बादल गए बरसात गई, वो गई रौनक गई’ आदि रचनाएं सुनाकर वाहवाही लूटी। अनुराग तिवारी के संचालन में हुए कार्यक्रम में आयोजक गौरव त्रिपाठी, अमित भूषण तिवारी, धर्मेंद्र शर्मा, पल्लवी त्रिपाठी, गुड्डू, राजीव आदि मौजूद रहे।
कलाकृतियों का हुआ प्रदर्शन
आयोजन में कलाकृतियों का प्रदर्शन भी किया गया। प्रतियोगियों ने टैटू डिजाइन, हैंडक्राफ्ट, स्कैच, चित्रकला का ऑनलाइन प्रदर्शन किया। इस दौरान सर्वश्रेष्ठ कलाकृतियों में सुकृति दुबे, आंचल दुबे, अंकित राजपूत, ऋषभ यादव व कृतिका मिश्रा को सम्मानित किया गया।
महोत्सव में आज संगीत पर गोष्ठी
आयोजक गौरव त्रिपाठी ने बताया कि महोत्सव में बुधवार को दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, जर्मनी, न्यूयार्क, आस्ट्रेलिया में बसे नगरवासी भारतीयों से चर्चा कार्यक्रम में संगीत में बदलाव विषय पर गोष्ठी, मेरठ से रॉकबैंड की ऑनलाइन प्रस्तुति होगी।