रेलमंत्री का रेल बजट वीवीआईपी जिले कन्नौज के लिए
बेमतलब रहा। स्थानीय स्तर पर यात्रियों को कोई अतिरिक्त सुविधा या ट्रेन न
मिलने के कारण चौतरफा मायूसी ही हाथ लगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने
यह कहते हुए नाराजगी जताई की शहरों के रेलवे स्टेशनों की तरफ तो सरकार का
ध्यान है, पर ग्रामीण क्षेत्रों की तरफ नजर नहीं पड़ी है।
सुक्खापुरवा
निवासी नीलेश ने बताया कि कन्नौज से कानपुर व फर्रुखाबाद के बीच पैसेंजर
ट्रेनों की संख्या काफी कम है। उम्मीद थी कि रेल बजट में एक-दो पैसेंजर
ट्रेन मिलेंगी, पर ऐसा नहीं हुआ। यात्री रामचंद्र ने बताया कि शाम को सवा
सात बजे के बाद रात सवा 10 बजे तक कानपुर जाने के लिए कोई ट्रेन नहीं है।
इस रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ानी चाहिए थी। विलंदापुर के किसान रामपाल
का कहना है कि शहरों पर फोकस किया गया है, पर गांवों की रेल बजट में अनदेखी
हुई है। पनियारेपुरवा के अखिलेश ने कहा कि रेलव बजट कन्नौज के लिए बेमतलब
रहा है। सरकारों की खींचतान में जनता की उपेक्षा हुई है।
उधर, गुरसहायगंज
रेलवे स्टेशन पर लंबी दूरी वाली ट्रेनों का स्टापेज इस साल भी न शुरू होने
से लोगों में निराशा छा गई। ज्ञात हो कि कानपुर-कासगंज रेल रूट पर आमान
परिवर्तन के बाद लंबी दूरी की ट्रेनों के स्टापेज की मांग निरंतर उठती रही
है। नगर विकास मंच की ओर से कई बार रेलवे के अफसरों को पत्र भी भेजा गया
है।
नगर विकास मंच अध्यक्ष हरिओम गुप्ता ने बताया कि गोरखपुर रेल
महाप्रबंधक ने उन्हें पत्र भेजकर जानकारी दी कि कोलकाता आगरा व जयपुर
कामाख्या एक्सप्रेस ट्रेनों का वाणिज्यिक परीक्षण कराया गया है। इन ट्रेनों
का स्टापेज कराने के लिए प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया गया है।
हालांकि, इस रेल बजट में भी ऐसा हो नहीं सका है।
उन्होंने बताया कि अभी भी
गुरसहायगंज के लोगों को कानपुर, कलकत्ता या जयपुर जाने के लिए कन्नौज तक की
22 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी, तब कहीं जाकर वे ट्रेन पकड़ सकेंगे।