छिबरामऊ। छिबरामऊ विधानसभा के चुनाव में समाजवादी पार्टी को छोड़कर किसी भी दल का प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा सके हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि चार प्रत्याशियों को छोड़कर सबसे ज्यादा समर्थन नोटा को मिला है।
भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी अर्चना पांडेय को 124347, सपा प्रत्याशी अरविंद सिंह यादव को 122813, बसपा प्रत्याशी वहीदा बानो जूही को 21932, कांग्रेस प्रत्याशी विजय मिश्रा को 1177, बहुजन मुक्ति मोर्चा के अर्जुमान को 188, राष्ट्रीय समाज पक्ष के अंकित कुमार पाल को 235, जन अधिकार पार्टी के मोहम्मद चंदन को 4565, आम आदमी पार्टी के डॉ. चंद्रकांत यादव को 460, वोटर्स पार्टी इंटरनेशनल के लालू यादव को 181, निर्दलीय प्रत्याशी अमोल दीक्षित को 230, इमरान बेगम को 308, मोहम्मद कमर को 196, नुरुल शर्मा को 525, संजय को 1282 वोटों के अलावा नोटा को 1775 वोट मिले। हैरान करने वाली बात यह है कि भाजपा, सपा, बसपा और जन अधिकार पार्टी के बाद सबसे ज्यादा 1775 वोट नोटा को मिले। सपा को छोड़कर कोई भी राजनीतिक दल अपनी जमानत नहीं बचा सका।
तीन चुनाव की रनर बसपा भी नहीं बचा सकी जमानत
छिबरामऊ विधानसभा में साल 2007, 2012 व 2017 के चुनाव में बसपा दूसरे नंबर पर रही थी। 2007 में बसपा प्रत्याशी बउअन तिवारी, 2012 व 2017 में ताहिर हुसैन सिद्दीकी दूसरे नंबर पर रहे थे। इस बार बसपा प्रत्याशी वहीदा बानो जूही महज 21932 वोट ही पा सकीं और उनकी जमानत भी नहीं बची।