इमरजेंसी वार्ड में दर्द से तड़पती युवती। संवाद
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तिर्वा। मरीज दर्द से तड़पते रहे। तत्काल तो दूर घरों इंतजार के बाद डॉक्टर पहुंच रहे हैं। यह हाल जिले के सबसे बेहतरीन कहे जाने वाले तिर्वा मेडिकल कॉलेज के हैं। डॉक्टरों और कर्मचारियों की बेरुखी देख तीमारदार कई बार तो मरीज को कानपुर या सैफई ले जाते हैं।
मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में आमतौर पर बहुत ही गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। उम्मीद यह होती है कि जल्द और अच्छा उपचार मिल सके। अफसोस कि यहां तैनात कर्मचारियों व डॉक्टरों की लापरवाही के चलते घंटों बाद मरीजों को उपचार मिल पाता है। कभी-कभी तो डॉक्टर मरीज को देखते ही कानपुर ले जाने की सलाह देने लगते हैं।
केस 1-थाना तालग्राम क्षेत्र के फिरोजपुर गांव निवासी सत्यवीर की पुत्री काजल (18) के सीने में रविवार को तेज दर्द उठा। परिजन आनन-फानन ही उसे लेकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे और उसे भर्ती कराया। भर्ती कराने के बाद भी काफी देर तक उसे उपचार नहीं मिला । कुछ स्थानीय लोगों के हस्तक्षेप पर इलाज शुरू हुआ।
केस-2-कोतवाली क्षेत्र के जटियापुर गांव निवासी राजेश (27) रविवार की सुबह गांव में हुई मारपीट में घायल हो गए। गंभीर हालत में परिजन उसे लेकर मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे। तीमारदारों का कहना है कि करीब डेढ़ बाद उनका इलाज करने के लिए चिकित्सक पहुंचे।
और मिला रटा रटाया जवाब
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डीएस मार्तोलिया ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में अगर डॉक्टर व कर्मचारियों ने लापरवाही की है तो इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई होगी।