फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काली और ईशन उफनाईं, तटवासी चिंतित

Sun, 09 Jul 2017 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूराो/कन्नौज
विज्ञापन
जरारा गांव के पास उफान पर आई ईशन नदी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
बारिश के बाद गंगा की सहायक काली और ईशन नदी भी उफान पर पहुंच गई हैं। ईशन नदी का जलस्तर जहां तेजी से बढ़ रहा है, वहीं काली नदी का पानी कई खेतों में घुस गया है। स्थिति यह है कि काली नदी के किनारे सैकड़ों बीघा मूंगफली की फसल चौपट हो रही है। प्रशासन ने अभी तक बाढ़ राहत के कोई इंतजाम नहीं किए हैं।
विज्ञापन


क्षेत्र के ग्राम जरारा के पास दो दिनों के अंदर ईशन नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है। ईशन नदी के किनारे फोरलेन पुल के निर्माण के लिए डेरा डाले सेतु निगम के कर्मचारी भी अब वहां से सामान समेटने लगे हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि इसी तरह जलस्तर बढ़ता रहा, तो आसपास के सभी खेत जलमग्न हो जाएंगे। कई किसान नदी के किनारे खेतों में मूंगफली की फसल समेटने में जुटे हुए हैं।

वहीं, काली नदी का पानी भी हिलोरे मार रहा है। तटवर्ती गांव रनवीरपुर के प्रधान देवेंद्र सिंह ने बताया कि तीन दिन से काली नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है। स्थिति यह है कि नगला दिलीप, मेरापुर गढ़िया, डालूपुर, नगला भौसे, मनिकापुर आदि गांवों में काली नदी के तट पर कटान होने लगी है, जिससे किसान भयभीत हैं। काली नदी में बाढ़ आने से इन गांवों में सैकड़ों बीघा मूंगफली की फसल चौपट हो गई है।
विज्ञापन

मालूम हो कि तीन साल पहले भी काली नदी में भयंकर बाढ़ आई थी, जिसमें नदी का पानी मेरापुर गढ़िया सहित कई गांवों में घुस गया था। प्रशासन ने काली नदी में बाढ़ राहत के लिए अभी कोई खास इंतजाम नहीं किए हैं।

क्या कहते जिम्मेदार
काली नदी में जलस्तर बढ़ने की सूचना मिली है। क्षेत्रीय लेखपालों को मौके पर भेजा गया है। सोमवार को वह स्वयं तटवर्ती गांवों का निरीक्षण करेंगे। किसानों और ग्रामीणों की हर-संभव मदद की जाएगी। प्रशासन ने बाढ़ राहत के पूरे इंतजाम किए हैं। - मंशाराम वर्मा-एसडीएम, छिबरामऊ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें