छिबरामऊ। पूर्व ब्लॉक प्रमुख के कई स्कूलों की जमीन की जांच शुरू हो गई है। एसडीएम के निर्देश पर नायब तहसीलदार व लेखपाल ने शुक्रवार को राजस्व रिकार्ड खंगालने शुरू कर दिए हैं। जांच के बाद ही पूर्व ब्लॉक प्रमुख के विद्यालय पशुचर की जमीन पर बने है या ऊसर की, इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। अगर पशुचर की जमीन है तो आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
भाकियू (औनू) के पूर्व प्रदेश महासचिव गोपाल दुबे ने पूर्व ब्लॉक प्रमुख बृजकिशोर सिंह यादव के 10 विद्यालय पशुचर की जमीन पर बने होने का दावा करते हुए शिकायत की थी। एसडीएम ज्ञानेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि ग्राम सभा असालत नगर के गाटा संख्या 92, 93, 94, 95 व 96 की भूमि की बिक्री रामप्रकाश निवासी छिबरामऊ, हाल निवासी कटरा बड़ा तालग्राम ने बृजकिशोर निवासी रामपुर बैजू के हक में की थी। इनका दाखिल खारिज एक नवंबर 1995 को किया गया था, जबकि यह भूमि राजस्व रिकार्ड में पशुचर में दर्ज है।
शिकायत की गंभीरता को देखते हुए राजस्व तथा चकबंदी विभाग के अफसरों से सभी प्रपत्रों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच के बाद ही पता चलेगा कि रामप्रकाश के नाम यह जमीन कैसे दर्ज हुई है। वहीं, पूर्व ब्लॉक प्रमुख का दावा है कि राजकिशोर दुबे ने 1950 में रामचरण गुप्ता को चार एकड़ ऊसर का रजिस्ट्रीशुदा पट्टा किया था। रामचरण की मौत के बाद बेटे रामप्रकाश ने उन्हें रजिस्ट्री बैनामा किया था, जो संक्रमण भूमिधर हैं। खतौनी फसली सन् 1356 में खसरा 115 ऊसर में दर्ज है।
वहीं, फसली 1459 में भी यह गाटा ऊसर में ही दर्ज है। 30 जनवरी 1951 में एसओसी ने उनके पक्ष में आर्डर किया है। तत्कालीन ग्राम प्रधान मंगूलाल ने उनके खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें पुलिस ने विवेचना के बाद फाइल रिपोर्ट लगा दी थी। इस संबंध में पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुमन यादव ने बताया कि जो भूमि उन्होंने खरीदी है, उसके साक्ष्य एसडीएम को दिए गए हैं। राजस्व अभिलेखों में भी वहां कोई पशुचर की भूमि दर्ज नहीं हैं। जांच में सब कुछ साफ हो जाएगा।