तालग्राम (कन्नौज)। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर 21 अगस्त की देर रात पुलिस कार को टक्कर मारने वाली ब्रेजा गाड़ी से बरामद सोने की 10 ईंटों का मामला बड़े अंतरराष्ट्रीय तस्करी रैकेट की तरफ इशारा कर रहा है। मामले की तह तक पहुंचने में जुटी जांच एजेंसियों के हाथ बड़ी सफलता लगी है। गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल से डिलीट की गई व्हाट्सएप चैट रिकवर होने के बाद महराजगंज (लक्ष्मीपुर) का एक मौलाना जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है।
आशंका जताई जा रही है कि यह मौलाना मूल रूप से बांग्लादेश का निवासी है। उसने अपनी पहचान छिपाकर फर्जी भारतीय दस्तावेज बनवा रखे हैं। आरोप है कि वह प्री-एक्टिवेटेड फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराकर तस्करी के इस काले कारोबार का सुरक्षित नेटवर्क तैयार करता था। इस खुलासे के बाद अब सफेदपोश चेहरों और बड़े सिंडिकेट के बेनकाब होने की संभावना है। 21 अगस्त की रात पकड़े गए आरोपियों नेपाल के जिला पल्पा के गांव हुंगी निवासी सरोज पंथ और महाराजगंज जिले के ठूठीबारी कस्बा निवासी संदीप जायसवाल से पूछताछ में मास्टरमाइंड रियाज और उसके सिंडिकेट का नाम सामने आया था। तस्करों का नेटवर्क दुबई, हांगकांग और मलेशिया तक फैला है, जहां से सोना नेपाल के रास्ते भारत लाया जा रहा था। सोने की यह खेप दिल्ली तक पहुंचाई जानी थी। जिस ब्रेजा कार से सोना ले जाया जा रहा था, उस पर पहले से ही 22 ई-चालान दर्ज हैं।
इनसेट
डीआरआई और कस्टम्स की पैनी नजर
अब इस पूरे मामले की जांच डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) और कस्टम्स की राज्य स्तरीय टीम कर रही है। कस्टम विभाग, स्थानीय पुलिस और एसएसबी (सीमा सुरक्षा बल) की संयुक्त टीमें सोनौली बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं ताकि नेटवर्क के हर एक मोहरे तक पहुंचा जा सके।
वर्जन
एक्सप्रेसवे पर सोने की ईंटों के साथ पकड़े गए तस्करों के पास से मिले डिजिटल साक्ष्यों और रिकवर की गई चैट से कई नए तथ्य सामने आए हैं। संदिग्धों की गतिविधियों और उनके नेटवर्क की कड़ियों की गहनता से जांच की जा रही है। संबंधित एजेंसियों के साथ तालमेल बनाकर पूरे तस्करी सिंडिकेट के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
-विनोद कुमार, पुलिस अधीक्षक