मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शुमार राजकीय
हृदय रोग संस्थान व राजकीय कैंसर अस्पताल के शासनादेश में भी ऊंचे ओहदों पर
बैठे अफसर किस तरह की अड़ंगेबाजी कर मामले को लटका देते हैं। इसका जीता
जागता उदाहरण कैंसर व हृदय रोग संस्थान के भवनों को देखकर लगता है।
पिछले
सात माह से दोनों अस्पतालों के भवन रिवाइज स्टीमेट के लिए जीओ होने के
इंतजार में खड़े हैं। जीओ न हो पाने से दोनों भवनों में निर्माण कार्य भी
कछुआ गति से चल रहा है। इन दोनों अस्पतालों को मार्च 2016 में शुरू होना
है। राजकीय मेडिकल कालेज कैंपस में सीएम अखिलेश यादव ने क्षेत्र के मरीजों
की सुविधा के लिए कैंसर अस्पताल व हृदय रोग संस्थान बनाने की स्वीकृति
प्रदान की थी।
शुरुआती दौर में राजकीय कैंसर अस्पताल के लिए प्रदेश शासन ने
61 करोड़ 31 लाख का बजट स्वीकृत किया था। इस अस्पताल को जून 15 तक पूरा
करने के निर्देश दिए गए थे। इसके निर्माण की जिम्मेदारी कार्यदायी संस्था
राजकीय निर्माण निगम को सौंपी गई थी। यह अस्पताल पांच मंजिल का बनना था।
अगस्त
13 में इस अस्पताल के भवन निर्माण का काम शुरू हो गया था। इसी तरह से हृदय
रोग संस्थान के भवन के लिए शुरुआत में 37 करोड़ 54 लाख का बजट स्वीकृत
किया गया था। यह अस्पताल भी पांच मंजिल का बनना था, इसका काम भी अगस्त 13
में शुरू हुआ था। मौजूदा समय में अस्पताल के भवन का निर्माण पूरा हो चुका
है।
फिनिशिंग, इलेक्ट्रिक, सेनिटेशन व एयर कंडीशन का काम अधूरा है।
कार्यदायी संस्था के परियोजना प्रबंधक बी.आर सिंह का कहना है कि शुरुआती
दौर में दोनों अस्पतालों के ड्राइंग्स बनाई गई थीं। ड्राइंग के बाद काम
शुरू करा दिया गया था। बाद में दोनों अस्पतालों की ड्राइंग मुख्यमंत्री के
समक्ष पेश की गई।
इसके बाद सीएम ने दोनों अस्पतालों का क्षेत्रफल व उसकी
सुविधाएं बढ़ा दी, जिससे बजट भी बढ़ गया। परियोजना प्रबंधक के मुताबिक
रिवाइज स्टीमेट में कैंसर अस्पताल का निर्माण अब 61 करोड़ के स्थान पर 186
करोड़ हो गया है। इसी तरह हृदय रोग संस्थान 37 करोड़ के स्थान पर अब 152
करोड़ की लागत से तैयार होगा।
उनके मुताबिक मई 15 में रिवाइज स्टीमेट के
लिए शासन को अभिलेख सौंप दिए गए थे। गत अक्तूबर में वित्त समिति की लखनऊ
में हुई बैठक के दौरान रिवाइज स्टीमेट को स्वीकृत कर दिया गया है। अब इस
रिवाइज स्टीमेट को आगामी कैबिनेट की होने वाली बैठक में जीओ के लिए पेश
किया जाएगा।
कैबिनेट की बैठक में मंजूरी मिलने के बाद ही बजट स्वीकृत होगा,
तभी दोनों अस्पतालों के भवन निर्माण में तेजी आ सकेगी।