शहर की फिजा में नफरत का जहर घोलने वालों ने दोनों
समुदायों को आमने-सामने खड़ा कर दिया है, पर इस आग में गरीब से लेकर
व्यापारी तबका बुरी तरह से सहमा हुआ है। वह कुछ भी बोलने बताने की स्थित
में नहीं है। व्यापारी वर्ग इत्र और इतिहास की नगरी में पहले जैसा माहौल
वापस लाने के लिए अपने ईष्ट से प्रार्थना कर रहे हैं।
तीन दिनों से
बिगड़े माहौल से पूरे शहर में मेडिकल स्टोर, मिष्ठान भंडार, कास्मेटिक
दुकानों, रेडीमेड कपड़ों, सर्राफा व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है।
कारोबार के ठप होने से करोड़ों रुपये के व्यापार चौपट हुआ है। शहर में विगत
तीन दिन पहले हुए दंगे के बाद अघोषित कर्फ्यू लागू कर दिया गया, जिससे शहर
में स्थित सभी तरह के मार्केट पूरी तरह से बंद हो गई।
तीन दिनों से किसी
भी दुकान के शटर का ताला नहीं खुला है। चूड़ी गली में लगभग 80 फीसदी
दुकानें मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों की हैं,, जबकि बीस फीसदी दुकाने
हिंदू समुदाय के लोगों की है। वर्षों से दोनों वर्ग आपसी सौहार्द से अपने
कारोबार को चला रहे हैं। बवाल होने के बाद सभी दुकानें बंद पड़ी है।
चूड़ी
गली का मार्केट पूरी तरह से कास्मेटिक पर निर्भर है। महिलाओं की
चूड़ियों सहित अन्य सौंदर्य के सामान की बिक्री होती है। करवाचौथ का
त्योहार आगे होने से दुकानदारों ने विशेष तैयारियां भी की, पर उनके इन
अरमानों पर किसी की नजर लग गई। सभी दुकानदारों का सामान दुकानों में भरा
पड़ा है।
व्यापारियों का कहना है कि एक दिन में लगभग पूरी चड़ी मार्केट में
पांच लाख रुपये तक की बिक्री है। इसके अलावा शहर में मेडिकल स्टोर, कपड़े
सहित अन्य सभी दुकानें पूरी तरह से बंद हैं, जिससे करोड़ों का व्यापार
प्रभावित हुआ है। मिष्ठान भंडार मालिकों का कहना है कि कर्फ्यू लग जाने से
कोई भी लेवर दुकान में नहीं आ पा रहा है।