हजरत ख्वाजा हाजी शरीफ जिंदनी रहतुल्लाह अलैह के सालाना उर्स के दूसरे दिन महफिले समां का आयोजन हुआ। कव्वालों ने कलाम पेश कर लोगों को वाहवाही करने पर मजबूर कर दिया। जवाबी कव्वाली का लुत्फ उठाने लोगों की भीड़ उमड़ी।
तीन दिवसीय उर्स में शनिवार देरशाम जवाबी कव्वाली का लुत्फ उठाने लोगों की भीड़ उमड़ी। मुंबई से आए कव्वाल राहत चिश्ती ने हम्द पढ़ी-मंदिर जाओ, मस्जिद जाओ यही खुलेगा राज कि अल्लाह बहुत बढ़ा है, कि मौला बहुत बढ़ा है। इसके बाद मन्कबत पेश की-कांसा है खाली नवाज दे, कहीं और न जाऊं तेरे दर से...पढ़ी।
इसे सुनकर महफिल झूम उठी। इसके बाद मेरा ख्वाजा महाराजा सुनकर लोग नोटों की बारिश करने लगे। मुंबई से आईं कव्वाला रूबी ताज ने नात शरीफ मोहम्मद का कोई नहीं... पेश कर लोगों को वाहवाही करने पर मजबूर कर दिया। आज दूल्हा बनें है हाजी शरीफ बाबा.. को सुनकर लोग थिरकने लगे।
इसके बाद गजलों का दौर शुरू हो गया। राहत चिश्ती ने सब को मालूम है वो मेरा महबूब था, उसको मालूम नहीं सच्ची मोहब्बत है क्या, फिर भी दिल उस पर फिदा है तो हमें क्या सुनाई। कव्वाला रूबी ताज ने दर्द सह लेते हैं चर्चा नहीं होने देते, हम कभी प्यार को रुसवा नहीं होने देते।
गजल सुनाकर लोगों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर उर्स कमेटी के सदर हाजी शमसुल खान, मेला प्रभारी उबैदुल हसन खलीफा, बाजार प्रभारी मास्टर वसीउद्दीन सिद्दीकी, बाजार प्रभारी मास्टर निजाम सिद्दीकी, अबुल हसन सिद्दकी उर्फ मंगल नेता, प्रोवेंडा सेक्रेटरी असीर खां, नावेद खान, शाहिद हसन, अफजाल खान, नूरशाहिद सिद्दीकी उर्फ रिंकू, सरफराज आलम अंसारी, आरएस कठेरिया सहित काफी लोग मौजूद रहे।
उत्पात मचाने वालों पर होगी कार्रवाई
शनिवार देर रात कव्वाली के दौरान कमेटी के सदर हाजी शमसुल खान के साथ आधा दर्जन युवकों ने अभद्रता की थी। मारपीट होते देख असलहे निकल आए। मामले की जानकारी पर भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और लाठियां पटककर युवकों को खदेड़ दिया। इस बीच एक आरोपी पकड़ गया।
लांकि बाद में पुलिस ने चेतावनी देकर युवक को छोड़ दिया। मामले में सदर ने कोतवाली पहुंचकर तहरीर दी। इस पर एसपी ने उक्त युवकों को चिंहित कर कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही अराजकतत्वों का निगरानी के लिए भारी पुलिस बल व पीएसी को मेला परिसर में तैनात किया है।
अहमदीटोला से निकाली गई गागर-चादर
शहर के मोहल्ला अहमदीटोला चांदनीचौक से रविवार की दोपहर बाद गागर-चादर निकाली गई। बैंडबाजे की धुन पर अकीदतमंदों की भीड़ हाजी शरीफ दरगाह तक पैदल पहुंची। मजार शरीफ पर चादर चढ़ाकर फातिहा पढ़ी और देश में अमन-चैन की दुआ मांगी।