सरकारी दवाएं सड़क पर फेंके जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अमर उजाला में खबर छपते ही शुक्रवार को अमोलर पीएचसी के डाक्टर ने दवाओं को कब्जे में ले लिया है। डाक्टर दवाओं का अनुमानित मूल्य नहीं बता सके, जबकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बचाव में लगे हुए हैं। दवाओं पर मिले बैच से दवाओं के कन्नौज में सप्लाई होने का स्पष्ट उल्लेख है। सीएमओ बोले, स्वास्थ्य विभाग मामले की जांच कर रहा है।
जानकारी के मुताबिक तालग्राम क्षेत्र में 50 एमलएल के फोरस सल्फेट व फोलिक एसिड की हजारों शीशियां गुरुवार को पड़ी मिली थी। दवाओं को देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ लगी रही। भीड़ में किसी ने दवाओं को सेहत की टानिक बता दिया। जिससे कुछ ग्रामीण दवाएं उठा ले गए हैं।
इधर, दवाओं के सड़क किनारे पड़ी होने की सूचना पर शुक्रवार की दोपहर बाद सीएमओ के आदेश पर अमोलर पीएचसी के डा. तरुण गुप्ता ने दवाओं को कर गत्ते में भराया और अस्पताल लेकर चले गए हैं।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग उन ग्रामीणों की खोज में भी लग गया है जो दवा उठा ले गए हैं। इधर, सड़क पर दवाओं को फेंके जाने की बात ग्रामीणों को समझ नहीं आ रही है। फेंकी गई दवाएं अभी एक्पायर भी नहीं हैं।
तालग्राम स्वास्थ्य केंद्र के एमओआईसी डा. इरशाद उनके क्षेत्र की दवाएं न होने की बात कह पल्लू झाड़ रहे हैं, जबकि जिला वितरण फार्मासिस्ट मान सिंह प्रजापति ने बताया कि दवाओं में अंकित बैंच नंबर (ओबीएल 270) जिला वितरण रजिस्टर में तालग्राम सीएचसी को पिछले साल आवंटित की गईं थीं।
वर्जन
सड़क किनारे पड़ी दवाओं को एकत्र करने लिए टीम के भेजा गया है। दवाओं को एकत्र कर जांच की जाएगी। इसके बाद ही मामले में कार्रवाई होगी। - एके पचौरी (सीएमओ, कन्नौज)