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सौ दिन रोजगार की गारंटी बना सपना

Mon, 22 Dec 2014 11:54 PM IST
अमर उजाला, ब्यूरो, कन्नौज
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गांव के बेरोजगारों को साल में सौ दिन रोजगार का सपना दिखाने वाली महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) सरकार के दावों पर खरी नहीं उतर रही है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के नौ महीने बीतने को हैं। लेकिन जिले में सिर्फ 88 परिवार ही ऐसे हैं, जिन्हें अब तक 100 दिन का रोजगार मिल सका है।
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जिले भर में मनरेगा में कुल 119839 परिवार पंजीकृत हैं। इनमें 118129 को जाबकार्ड जारी किए गए हैं। इसमें 41401 परिवारों ने ही रोजगार मांगा, लेकिन इनमें से 29081 परिवारों को ही काम का अवसर उपलब्ध कराया जा सका है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो मनरेगा गांव के लोगों को भरपूर रोजगार दे पाने में नाकाम साबित हो रही है।

आम तौर पर विकास कार्य न होने का कारण बजट की कमी बताई जाती है, लेकिन मनरेगा में भरपूर बजट मिलने के बावजूद रोजगार के अवसर नहीं सृजित हो पा रहे हैं। इसके पीछे लोग सरकारी तंत्र और जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार मान रहे हैं।
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मनरेगा के क्रियांवयन में लापरवाही के कारण श्रमिकों का इससे मोह भंग हो रहा है। यही वजह है कि तमाम जाब कार्ड धारक जिले के बाहर काम की तलाश में पलायन कर गए हैं। जिले भर की 441 ग्राम पंचायतों में कुल 118129 लोगों ने मनरेगा में जाब कार्ड बनवा रखे हैं।

इनमें से 22 दिसंबर 2014 तक मात्र 46405 लोगों ने ही काम मांगा है। यानि जाब कार्ड के सापेक्ष काम मांगने वालों की संख्या 50 फीसदी से कम पर आकर अटक गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले से लेकर ब्लाक तक के ज्यादातर अफसरों का पूरा ध्यान बैठक व पत्राचार करने में लगा है।

जबकि फील्ड वर्क कम होने से सिर्फ कोरम पूरा करके कागजी घोड़े दौड़ रहे हैं। इसीलिए मनरेगा में ज्यादा धनराशि खर्च करने और ज्यादा लोगों को काम देकर गांवों का ज्यादा विकास कराने का सपना साकार नहीं हो पा रहा है। संविदा पर तैनात तमाम कर्मचारी तो बाबुओं के रिश्तेदार व परिजन हैं, जिस कारण वे बेलगाम होकर काम चोरी पर आमादा हैं। दिखावे के लिए नोटिस तो खूब जारी होती हैं पर हकीकत में कार्रवाई नाममात्र की भी नहीं होती है।
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ब्लाक        रोजगार मांगा   रोजगार मिला
उमर्दा           9909          6852
कन्नौज         7662          5152
गुगरापुर        2353          1416
छिबरामऊ      6353          4195
जलालाबाद     3052          2160
तालग्राम       5182           3256
सौरिख         6904           4640
हसेरन         4990            3581
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8 ब्लाक       46405        31252
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ब्लाकों में 100 दिन काम पाने वाले परिवार
उमर्दा में 9, कन्नौज में 5, गुगरापुर में 1, छिबरामऊ में 2, जलालाबाद में 3, तालग्राम में 28, सौरिख में 12 और हसेरन में 28।
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प्रधान बोले, भुगतान में होती है देरी
छिबरामऊ ब्लाक की ग्राम सभा सराय सुंदर के प्रधान सर्वेश कुमार का कहना है कि 13 दिसंबर से 30 दिसंबर 2013 तक तालाब खुदाई में अमरपाल ने 18, आनंद ने 18, भूप सिंह ने 13, दिवारीलाल ने 11 दिन काम किया। इन श्रमिकों का पैसा अभी तक बकाया है। इस कारण मनरेगा के कार्यों में लेबर काम करने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसीलिए मनरेगा का कार्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने समस्या की सीडीओ को लिखित रूप से जानकारी दी है।
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कागजों पर कैद होकर रह गई योजनाएं
प्रदेश सरकार की तरफ से मनरेगा समेत अन्य स्थानों श्रमिकों का कल्याण करने के लिए 16 योजनाएं संचालित हैं। इसमें मजदूर की बीमारी, बच्चों के जन्म, पढ़ाई-लिखाई, शादी, बीमारी, दुर्घटना से लेकर अन्य स्थिति में मदद का प्राविधान है।

लेकिन ज्यादातर योजनाएं कागजों में ही कैद होकर रह गई हैं। मजदूरों के मध्य योजनाओं का प्रचार प्रसार न होने के कारण वे लाभ लेने से वंचित हो रहे हैं। यही नहीं विभाग जब लोगों को श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ पहुंचाता है तो उसकी जानकारी देने से कतराता है।
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मनरेगा में अधिक से अधिक लोगों को काम का मौका देने के लिए प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं। कम धनराशि खर्च करने वाले प्रधानों और सचिवों को नोटिस भेजकर कार्रवाई की जा रही है। श्रम प्रवर्तन अधिकारी को श्रमिकों के हित की योजनाओं का कैंप लगाकर प्रचार-प्रसार कराने व लाभाथिर्यों को सामूहिक रूप से लाभांवित कर प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए हैं।
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-अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी कन्नौज।
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इन मुद्दों पर फोकस करें तो आए तेजी
-अधिक विकास कार्य कराकर ज्यादा धनराशि खर्च करने व ज्यादा मजदूरों को काम का मौका देने वाली ग्राम सभा के प्रधान व सचिव हों सम्मानित।
-कई सालों से एक ही विकास खंडों में डटे अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों के ब्लाक क्षेत्र में फेरबदल हो।
-सीडीओ, बीडीओ व एडीओ स्थलीय निरीक्षण बढ़ाएं। लोहिया गांव के साथ अन्य ग्रामसभाओं के भी औचक दौरे हों।
-लेखपाल मांग के अनुरूप तत्काल पैमाइश करें।
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