सांप्रदायिक संघर्ष के बाद छह दिन तक खौफ के साये में रहे शहर के बाशिंदों की जिंदगी आहिस्ता-आहिस्ता रफ्तार पकड़ने लगी है। खौफ का कहर झेल रहे शहर में बुधवार को ज्यादातर दुकानें खुलीं। दिन भर बूंदाबांदी के बावजूद शहर के व्यापारियों ने दुकानें खोली।
दुकानें खुलने से शहर के हालात सामान्य होते दिखाई दिए। घरों से निकलकर लोग सड़कों व मार्केट में पहुंचे और खरीददारी की। इससे शहर की पुरानी रंगत फिर से लौटती नजर आई। वहीं, तनाव के मद्देनजर पुलिस, पीएसी व बीएसएफ के जवान चप्पे-चप्पे पर नजरें गड़ाए गए।
एसडीएम व सीओ लाव लश्कर के साथ घूम-घूमकर सुरक्षा का जायजा लेते रहे। हालांकि नगर के अधिकांश विद्यालय बुधवार को नहीं खुले। इक्का-दुक्का खुले विद्यालयों में छात्रों की संख्या नगण्य रही। अफसरों का कहना है कि स्कूल खोलने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। छात्रों की संख्या बढ़ाने का प्रयास जारी है।
छह दिन तक शहर में बवाल के चलते स्कूल प्रबंधकों व प्रशासन ने विद्यालयों में तालाबंदी कर रखी थी। प्रशासन ने बुधवार से नगर के सभी विद्यालयों को खोलने के निर्देश जारी किए थे। दंगे से काफी भयभीत हो चुके लोगों ने प्रशासन के सुरक्षा के भरोसे को नजरंदाज करते हुए अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजा।
इसके अलावा नगर के अधिकांश इंटर कालेज बंद रहे। परिषदीय विद्यालयों में भी न ही स्टाफ पहुंचा और न बच्चे। पीएसएम महाविद्यालय में स्टाफ तो पहुंचा लेकिन प्राचार्य ने पहले ही अनाध्याय घोषित कर दिया था। डीआईओएस केपी सिंह यादव ने कहा कि स्कूल खोलने के निर्देश जारी किए जा चुके हैं।
शहर के हालात को देखते हुए स्कूलों में छात्र संख्या कम रही है, जिसको बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। बीएसए रामकरन यादव ने कहा कि स्कूल नगर के खोले गए हैं, हालांकि छात्र संख्या कम रही है। गुरुवार से विधिवत तरीके से अध्यापन का कार्य होगा।