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सरकार! कब पूरे करेंगे आश्वासन

Thu, 28 Jan 2016 11:49 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
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देश की खातिर जान गंवाने वाले जवानों की कुर्बानी के वक्त तो सरकारी तंत्र उनकी सदैव मदद करने के वादे करते हैं, पर जैसे-जैसे समय बीतता जाता है, वैसे वैसे उनके वादे हवा में उड़ जाते हैं।
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ब्राहिमपुर गांव निवासी फौजी रामशरण यादव का पुत्र राजेश कुमार दंतेबाड़ा छत्तीसगढ़ में 6 अप्रैल 10 को देश की रक्षा करते हुए मर मिटे थे। गांव में उनके शव के अंतिम संस्कार के वक्त उनके भाई को नौकरी व परिवार को गैस एजेंसी देने के वादे अफसरों ने किए थे, जो कोरे साबित हुए हैं।

शहीद के पिता रामशरण फौजी ने बताया कि स्मारक स्थल बनवाने को भी शासन ने फूटी कौड़ी नहीं दी। कुल तीन एकड़ कृषि भूमि ही मिली। पिता के अनुसार बेटे के शहीद होने के बाद तत्कालीन सांसद अखिलेश यादव घर पर आए थे। उन्होंने सपा सरकार बनने के बाद एक पुत्र को नौकरी व शहीद का स्मारक स्थल निर्माण में होने वाले खर्च को देने का आश्वासन दिया था, पर नतीजा शून्य ही निकला।
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तमाम प्रयासों के बावजूद केंद्र सरकार से गैस एजेंसी भी नहीं दी गई। देश पर कुर्बान राजेश के भाई राजीव को नौकरी देने को कागजात तो तैयार कराए गए, पर बाद में मना कर दिया गया। कहा गया कि शहीद की पत्नी या पुत्र को ही नौकरी मिल सकती है।

मौजूदा समय में शहीद की विधवा कमला देवी इस समय फतेहगढ़ में किराए के मकान में रहकर आठ वर्षीय पुत्री चिंकी की शिक्षा करा रही है। परिजनों के अनुसार शहीद का स्मारक बनवाने में 11 लाख रुपये खर्च हुए थे, जिसमें समाजसेवी धर्मेंद्र यादव ने साढ़े तीन लाख रुपये की ईंट, सीमेंट आदि का सहयोग किया था।

शेष रुपये परिवार ने ही लगाए। आश्वासन के बावजूद स्मारक निर्माण के लिए फूटी कौड़ी तक नहीं मिली। फिलहाल देश की रक्षा की खातिर जान तक न्योछावर करने वालों के परिवार की उपेक्षा से ग्रामीण भी नाराज हैं। उनका कहना है कि यदि सरकारें अपने वादे पूरे नहीं कर सकती हैं तो आश्वासन क्यों देती हैं? जवानों के मामले में वादे करके पूरे न करना दुखद है।
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