विशुनगढ़ (कन्नौज)। केंद्र व प्रदेश सरकार के गांवों में विकास के दावे डेरा जोगी में खोखले साबित हो रहे हैं। गांव में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने से गंदा पानी सड़कों पर भरा रहता है। आवास योजनाओं के पात्र होने के बाद भी लोग झुग्गी और झोपड़ियों में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।
लगभ आठ सौ वोटों वाले गांव डेरा जोरी के लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव की रामवती पत्नी रघुनाथ ने बताया कि वह वर्षों से झोपड़ी में जीवन यापन कर रही है। प्रधान से कई बार आवास के लिए कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। राजेश्वरी पत्नी मुकेश नाथ का कहना है कि गांव में जल निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण सड़क पर पानी भरा रहता है। जिस कारण अक्सर गांव में लड़ाई झगड़े होते रहते हैं। खिलौना नाथ पुत्र नरेश नाथ का कहना है कि वह इधर उधर मांग कर अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं। उसके परिवार सर्दी हो या गरमी, या फिर बरसात, झोपड़ी में जीवन जी रहे हैं। इसी तरह से रामवती पत्नी रघुनाथ ने बताया कि उसके पति की मौत पांच वर्ष पहले हो गई थी। उसे अभी तक पेंशन का लाभ नहीं मिल सका।
इस संबंध में प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश राजपूत ने बताया कि गांव के विकास के लिए लेखपाल व राजस्व निरीक्षक द्वारा मुआयना करवाया गया। लोक निर्माण विभाग की सड़क होने के कारण पानी निकासी की व्यवस्था नहीं करवाई जा सकी है। उन्होंने कहा कि आवास सहित अन्य योजनाओं के लिए सूची भेजी जा चुकी है।