करीब एक माह तक चुनाव की व्यस्तता के बाद सरकारी कार्यालयों में दूसरे दिन भी सन्नाटा दिखा। कलक्ट्रेट से लेकर विकास भवन के दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारी लेट पहुंचे और सरकारी कार्यों को निपटाया। वहीं दफ्तरों में चुनावी चर्चाएं भी जारी रहीं।
कलक्ट्रेट स्थित चुनाव कार्यालय में अफसरों व बाबुओं ने चुनाव संबंधी कागजातों व आंकड़ों को दुरुस्त किया। जिलाधिकारी अपने कार्यालय में बैठे, लेकिन कोई भी फरियादी नहीं पहुंचा। कुछ ऐसा ही आलम विकास भवन का भी दिखाई दिया। कई दफ्तरों में तो पटलों पर बाबू ही दिखाई नहीं दिए। तिर्वा प्रतिनिधि के मुताबिक, एसडीएम व तहसीलदार कुछ देर के लिए कार्यालय आए। बाद में जिला मुख्यालय चले गए। उप निबंधक कार्यालय में भी सन्नाटे का आलम रहा।
खतौनी कंप्यूटरीकृत कार्यालय में भी किसान अपनी खतौनी के लिए लाइन में लगे नहीं दिखाई दिए। यही हालत ब्लाक कार्यालय भी दिखी। यहां बीडीओ अपने दफ्तर में दिखे पर अधिकांश कर्मचारी नदारद रहे। जो भी स्टाफ दिखाई दिया वह अपना पेंडिंग काम निपटाते दिखे।