हृदयेश तिवारी जो अपनी एक विशिष्ट शैली के लिए अलग से
पहचान हुए है। फौजी से गो सेवक बने तिवारी अपने संबोधन में अब जय हिंद की
जगह गो माता बोलने लगे हैं। सड़क पर घूम रही और गंदगी खाने को मजबूर गायों
को वह पालते है और उनकी सेवा करते हैं।
इस समय उनके पास करीब 50 गायें
हैं, जिनकी वह सेवा कर रहे हैं। गांव अरुहो कर्री निवासी हृदयेश तिवारी
पहले जेल पुलिस इंदौर में नौकरी करते थे। इसके बाद उन्होंने आर्मी ज्वाइन
की। आर्मी की नौकरी के बाद उन्होंने अपने जीवन को गायों की सेवा के लिए
समर्पित कर दिया।
1996 में उन्होंने गो सेवा का बीड़ा उठाया तो फिर कभी
मुड़के नहीं देखा और कई बार उन्हें घर की और बाहर की आलोचनाएं भी सुननी
पड़ीं, पर अपने काम में तल्लीन रहे। सड़क पर घूम रही आवारा गायों को वह
लाकर बांधते हैं और फिर उनकी अपने रुपयों से चारे का इंतजाम कर उनकी सेवा
करते हैं।
पहले वह किसी से नमस्कार की जगह जय हिंद बोलते थे। अब वह जय हिंद
की जगह जय गो माता की बोलते है। उनके इस मिशन को देख गांव के ही अनिल
यादव, प्रेमनारायन कठेरिया व बनवासी सिंह भी उनके साथ जुड़ गए हैं। वर्ष
06 में राधाकृष्ण गोशाला के नाम से पंजीकरण कराने के बाद सभी लोग गो सेवा
में जुट गए।
आज गोशाला में करीब 50 गायें हैं। यह सभी लोगों ने अपने रुपयों
से गोशाला का निर्माण किया और रोज चारे का भी इंतजाम करते है। इन गायों का
इलाज भी अपने खर्चे पर ही कराते हैं। गोसेवा कर रहे हृदयेश तिवारी और अन्य
बताते है कि गो माता है, जिसमें सभी देवी-देवताओं का वास है।
कहा कि अगर
सरकार से कुछ अनुदान मिल जाए जिससे कि वह गोशाला को और अच्छा बना सके। वह
बताते है कि अभी भी अगर कोई उन्हें गाय गंदगी खाते या आवारा घूमती दिखाई
पड़ती है तो वह उसे अपनी गोशाला में ले आते हैं। अब हृदयेश व अन्य गोसेवकों
के हौसलों को देख अधिकतर लोगों ने अपने घरों में भी गाय की सेवा करने लगें
हैं।