लगातार बढ़ रही गलन से जन-जीवन अस्त व्यस्त हो गया है। करीब एक सप्ताह से सूर्यदेव की लुका-छिपी का खेल जारी है। शाम होते ही कोहरे की धुंध छा जाने से मार्केट में भी सन्नाटा पसर जाता है। सर्दी के चलते लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए हैं।
शनिवार को भी दोपहर दो बजे के बाद कुछ देर के लिए सूर्य के दर्शन तो हुए पर गलन कम नहीं हुई। शाम होने के बाद कोहरे की धुंध ने वातावरण को दोबारा अपने आगोश में ले लिया। सर्दी से निजात पाने के लिए लोग जगह-जगह पर लकड़ी व अलाव जलाकर सर्दी से बचाव का प्रयास करते दिखे।
घरों से मजबूरन निकलने वाले लोग भी गरम कपड़ों के साथ चेहरे को ढांककर निकले। ताकि चलने वाली शीत लहर के प्रकोप से बचा जा सके। उधर मौसम की खराबी के चलते आलू सहित विभिन्न फसलों में झुलसा सहित अन्य रोगों से ग्रसित हो चुकी हैं। इसके लिए किसान फसलों में दवाइयों का छिड़काव कर रोग को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
सड़कों पर चलने वाले वाहनों की कोहरे के चलते रफ्तार धीमी पड़ गई है। शाम ढलने के बाद मुख्य मार्गों पर सन्नाटा छा जाता है। कानपुर-फर्रुखाबाद के बीच चलने वाली तमाम ट्रेन घंटों देरी से पहुंच रही हैं। जिससे यात्रियों को स्टेशन पर बैठकर इंतजार करने को विवश होना पड़ रहा है।
सर्दी से बचाव के लिए क्या करें
विनोद दीक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डा. नितन वैश्य ने बताया कि सर्दी से बचाव के लिए सतर्कता की जरूरत है। सर पर ऐसी टोपी लगाएं, जिससे कान ढंके रहें। हाथों में ग्लब्स पहनें। पैरों में मोजे व जूते अवश्य पहनें। एक मोटा कपड़ा पहनने के बजाय कई ऊनी व सूती कपड़े पहनें।
गुनगुना या ताजा पानी का प्रयोग करें। कमरे में कोयला या आग न जलाएं। इससे आक्सीजन की कमी होने पर दम घुटने का खतरा बढ़ जाता है। खाली पेट घर से न निकलें। खाना गर्म खाएं। छोटे बच्चों को गर्म कपड़ों में लपेटकर रखें।
तीन दिनों में सबसे ठंडा रहा शनिवार
बुधवार को अधिकतम तापमान 13.5 व न्यूनतम 9.2, गुरुवार को अधिकतम 14.8 व न्यूनतम 8.5, शुक्रवार को अधिकतम 13.8 व न्यूनतम 7.5, शनिवार को अधिकतम 14.6 व न्यूनतम 4.8 रहा है। तीन दिनों में शनिवार का दिन सबसे अधिक सर्द रहा है।
वहीं अधिक पाले से सबसे अधिक आलू व मटर को नुकसान पहुंच रहा है। जिला कृषि अधिकारी अभिनंदन सिंह यादव ने कहा कि झुलसा रोग का कोई विशेष उपचार नहीं है। खेत में एक बार फैल जाने पर उसे रोक पाना मुश्किल होता है। झुलसा रोग लगने के बाद पूरी फसल केवल रसायनिक दवाओं के सहारे ही केंद्रित हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि किसान दवाओं का छिड़काव बराबर करते रहें।
ट्रेनों की रफ्तार हुई प्रभावित
कोहरे के चलते शनिवार को ट्रेनों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा। भिवानी से कानपुर सेंट्रल जाने वाली कालिंद्री एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय 9.07 से आधा घंटा देर से आई। वहीं लखनऊ से जयपुर जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन अपने निर्धारित समय 15.32 से तीन घंटे देर से स्टेशन पर आई।
इसके अलावा इलाहाबाद-फर्रूखाबाद पैसेंजर ट्रेन चार घंटा देर से आई। अन्य ट्रेनें भी 20 से लेकर 30 मिनट लेट रहीं। इससे यात्रियों को इधर-उधर भटकना पड़ा। वहीं सड़कों पर भी वाहनों की कमी रही। कोहरे के चलते वाहन सड़कों पर रेंगते नजर आए। शाम होते ही कोहरे की घनी चादर ने सड़कों को ढक लिया।