तिर्वा। तहसील क्षेत्र के औसेर गांव में पांडु नदी उफान पर है। यहां नदी का पानी खेतों में घुस आया है, जिससे गांव के सैंकड़ों बीघा बोई गई मक्का और धान की फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से नदी की सफाई और संरक्षण पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके चलते नदी का रास्ता सिमट गया। बारिश में इसका जलस्तर बढ़ने पर आसपास की फसलें डूब जाती हैं।
महेंद्र तिवारी, गुड्डू दुबे, रमेश पांडेय, मंगली सक्सेना, अशोक कुशवाहा, शानू वाजपेयी आदि किसानों ने बताया कि फसल नदी के पानी में डूबकर खराब हो रही है। इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि प्रशासन ने नदी-नहर संरक्षण अभियान के तहत केवल औपचारिकता निभाई है। यदि समय रहते नदी का रखरखाव किया गया होता, तो आज किसानों को नुकसान का सामना नहीं करना पड़ता। किसानों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द राहत कार्य शुरू कर उन्हें मुआवजा उपलब्ध कराया जाए। एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि बाढ़ से हुए नुकसान का लेखपालों के माध्यम से आंकलन कराया जा रहा है। इसके बाद रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।