कस्बे में पंचायत घर के पास शहीद स्थल पर कई करोड़
रुपये की लागत से बनी पानी की टंकी इन दिनों शोपीस बनी है। ग्रामीण
बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। एक हजार से अधिक परिवारों को पेयजल
संकट से जूझना पड़ रहा है। शिकायत के बावजूद न तो अफसर ध्यान दे रहे और न
ही जनप्रतिनिधि।
टंकी के संचालन में हो रही लापरवाही का खामियाजा जनता को
भुगतना पड़ रहा है। एक ओर जहां शासन की योजना का लाभ जनता तक नहीं पहुंच
पा रहा, वहीं दूसरी ओर अफसरों की निष्क्रियता से सरकार की छवि खराब हो रही
है। विनोद अवस्थी, मनीराम वर्मा, लाखन आदि का कहना है कि सीएम अखिलेश यादव के
प्रयास से ग्रामीण पेयजल योजना के तहत दो करोड़ 78 लाख रुपये खर्च कर यह
टंकी जून 12 में बनी थी। इस टंकी से कभी भी पूरी क्षमता से जलापूर्ति नहीं
हुई।
इस टंकी को जनवरी 13 को जल निगम ने ठठिया ग्राम पंचायत के हवाले कर
दिया था। टंकी में पानी भरने के लिए दो सबमर्सिबल पंप लगाए गए हैं। इसमें
से एक करीब डेढ़ साल पहले खराब हो गया था। तब से यह लगातार बेकार ही पड़ा
है।
पानी में क्लोरीन की सप्लाई के लिए लगी डोजर मशीन भी दो साल से
धड़ाम है।
दूसरे सबमर्सिबल पंप में पांच दिन पहले खराब आ गई थी, जिससे टंकी
पानी से नहीं भर पा रही है। इस कारण ठठिया, होलेपुर, खेड़ा, रामपुर,
पुरानी ठठिया, रिक्खापुरवा, रंगियनपुरवा, बहादुरपुर, बेहटा, दौलतपुर,
टिकौरियनपुरवा, कुरियाना आदि मजरों की सप्लाई भी ठप हो गई है।
बीते पांच
दिनों से पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची है, पर गड़बड़ी ठीक कराने के लिए
कोई सामने नहीं आ रहा है। उधर, 13 जनवरी 13 को सीएम ने ही टंकी का लोकार्पण
किया था। इसका शिलापट आज तक टंकी की चहारदीवारी पर नहीं स्थापित किया जा
सका है। यह शिलापट कोने में पड़ा धूल खा रहा है। लोगों का कहना है कि जब
सीएम के उद्घाटन संबंधी शिलापट का यह हाल है तो लापरवाही का अंदाजा लग जाता
है।