कन्नौज। दूसरी शादी के बाद पत्नी के साथ आए आठ साल के बेटे की हत्या कर शव को छिपाने वाले पिता को शुक्रवार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने उस पर 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। पिता ने अपने पड़ोसियों को फंसाने के लिए सौतेले बेटे की हत्या का कुचक्र रचा था।
तालग्राम थाना क्षेत्र के रोहली गांव निवासी अनिल वाल्मीकि पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज में सफाई कर्मी है। उसका आठ वर्षीय सौतेला बेटा अंशू छह दिसंबर 2021 की रात घर के बाहर झोपड़ी में दादी सरस्वती के साथ सोते समय लापता हो गया था। अगले दिन शाम चार बजे गांव के रंजीत यादव के खेत में गट्ठर के पास अंशू का शव मिला था। पुलिस ने मां संतरानी की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ बेटे अंशू की हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज की थी। उस समय पुलिस को अनिल ने बताया था कि वर्ष 2013 में उसका भाई पप्पू लापता हो गया था। गांव के चार लोगों के खिलाफ उसने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने चार लोगों पर बेटे की हत्या करने का आरोप लगाया था।
तत्कालीन थाना प्रभारी कमल भाटी को उसकी बातों से शक हुआ कि अनिल ने ही अंशू की हत्या की है। पुलिस की गिरफ्त में आने से पहले ही अनिल जमीन बेच कर पत्नी संतरानी और मां सरस्वती के साथ फरार हो गया था। अप्रैल 2022 में पुलिस ने अनिल को गिरफ्तार कर लिया और जेल भेज दिया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वितीय लोकेश वरुण ने मामले की सुनवाई की। साक्ष्यों के आधार पर अनिल को उम्रकैद और 10 हजार रुपये का अर्थदंड की सजा सुनाई।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अनिल की पहली शादी जनपद फर्रुखाबाद के थाना जहानगंज के अंतर्गत ग्राम पंजू खिरिया निवासी रीता से हुई थी। वर्ष 2019 में तीन बच्चों के साथ वह मायके चली गई। वर्ष 2020 अनिल ने जनपद हमीरपुर के थाना मौदहा अंतर्गत ग्राम उमरौदा निवासी संतरानी से दूसरी शादी की थी। संतरानी के साथ अंशू भी साथ आया था। अंशू के सौतेले होने के कारण अनिल उससे नफरत करता था। रंजिश में चार ग्रामीणों को फंसाने के लिए उसने अंशू की हत्या को अंजाम दिया था। शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि अर्थदंड अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा काटनी होगी।
पुलिस ने अनिल पर घोषित किया था 25 हजार का इनाम
सौतेले बेटे की हत्या के बाद फरार हुए सफाई कर्मी अनिल बाल्मीकि पर तत्कालीन एसपी कुंवर अनुपम सिंह ने 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने अनिल बाल्मीकि को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसे कोर्ट में पेश किया तो उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर उसे सजा सुनाई गई और उसे न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया गया।