किसानों को जल्द से जल्द बीमा क्लेम दिलाने के कृषि विभाग के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। विभाग ने 10 जून तक सभी पात्र किसानों को क्लेम बंटवाने का दावा किया था। लेकिन बीस दिन बाद भी पूरे लाभार्थियों का चयन तक नहीं हो सका है। बीमा कराने वाले किसानों को यही नहीं पता चल पा रहा है कि उन्हें कब तक क्लेम का रुपया मिलेगा।
इन दिनों धान की रोपाई का काम चल रहा है। ऐसे में किसानों को रुपयों की जरूरत है। लेकिन ऐन मौके पर कृषि विभाग और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी ने धोखा दे दिया है। गौरतलब है कि जनपद में रबी के सीजन में 16024 किसानों ने बीमा कराया है। इनके खाते से कई करोड़ रुपये बतौर प्रीमियम बीमा कंपनी को दिया गया था। क्राप कटिंग रिपोर्ट भेजे एक महीने से भी ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन बीमा करने वाली एजेंसी लाभार्थी किसानों की चयन सूची ही फाइनल नहीं कर सकी है।
पहली किश्त में चार हजार से ज्यादा किसानों को पात्र पाया गया था, लेकिन एक पखवारा बीत जाने के बाद भी अवशेष लाभार्थियों की संख्या नहीं निकल पाई है। बीमा कंपनी के ढुलमुल रवैये के कारण हजारों किसान अब भी फसल बीमा के लाभ से वंचित हैं। कांग्रेस नेता अनुज मिश्र कक्का का कहना है कि क्लेम पाने के लिए दर-दर भटक रहे किसानों को न तो बैंकों में कोई जानकारी मिल रही है और न ही उप निदेशक कृषि कार्यालय से। उच्चाधिकारियों को फौरन इस मामले में कड़ा रुख अपनाना चाहिए।
बिना कार्यालय, कहां करें शिकायत
जिले में बीमा कंपनी ने कोई कार्यालय नहीं खोला है। लखनऊ से ही जनपद की इस योजना को संचालित किया जा रहा है। इस वजह से किसान अपनी शिकायतें नहीं दर्ज करा पा रहे हैं। परेशान किसान भी बीमा कंपनी के क्षेत्रीय प्रतिनिधि समेत अन्य अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
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डीएम तीन को बुलाई बैठक
डीएम अनुज कुमार झा ने क्लेम वितरण में हो रही देरी पर नाराजगी जताई है। उन्होंने तीन जुलाई को कलेक्ट्रेट सभागार में उप निदेशक कृषि, सीडीओ, लीडबैंक मैनेजर और बीमा कंपनी के क्षेत्रीय प्रतिनिधियों को बुलाया है। इस बैठक में किसानों के क्लेम वितरण में हो रही देरी के कारणों पर चर्चा होगी।