कन्नौज। मौसम की मार से आलू की पैदावार में गिरावट आई है। दिसंबर व जनवरी में हुई बारिश का असर दिखने लगा है। आलू का साइज जहां छोटा रह गया है, वहीं खुदाई के समय 10-15 पैकेट (प्रति पैकेट 50 किलो) कम आलू निकल रहा है। किसानों को इस बार ज्यादा मुनाफा नहीं हो सकेगा। कम पैदावार देख किसान खासे परेशान हैं।
जिले में इस साल किसानों ने आलू की खेती 47,500 हेक्टेयर में बोआई की थी। आलू की खेती करने वाले किसानों को उम्मीद थी कि इस बार पैदावार अच्छी होगी, लेकिन बीच में मौसम खराब होने से पाला पड़ने से आलू की फसल प्रभावित कर दी है। हालांकि, किसानों ने दवा आदि के छिड़काव कर फसल को बचाने की कोशिश की। दिसंबर और जनवरी में इस बार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर सारा पानी फेर दिया। 15 से 20 फीसदी पैदावार कम हो गई है। हालत यह है कि एक बीघा में 35 से 40 पैकेट निकलने वाला आलू घटकर 25 से 30 पैकेट पर आ गया। मौसम की मार से आलू का साइज भी छोटा रह गया। खुदाई कर रहे किसान कम आलू निकलने से परेशान हैं। लगातार घाटा होने से पिछले कई साल से आलू की खेती करने वाले किसानों की संख्या में कमी आने लगी है। इसके चलते आलू भंडारण के लिए खोले गए शीतगृह भी आधे-अधूरे भर पाते हैं। किसानों को उम्मीद है पैदावार कम होने से आलू का दाम बाजार में अधिक होने से आम लोगों पर इसका असर दिखेगा। वहीं, वर्तमान में आलू छह सौ से साढ़े छह सौ रुपये प्रति पैकेट बिक रहा है। इससे किसानों की हालत ज्यादा पतली है।
अमर सिंह का कहना है कि इस बार बारिश व पाला पड़ने से झुलसा रोग लग गया। दवा डालकर फसल पर छिड़काव किया लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। इससे आलू की पैदावार में गिरावट आई है।
किसान आनंद सिंह ने बताया कि कच्ची फसल में इस बार किसानों की चांदी रही। उम्मीद थी कि पक्की फसल भी बेहतर होगी लेकिन बारिश व पाला ने किसानों की उम्मीदों पर सारा पानी फेर दिया। इससे पैदावार में कमी आई है।
शिव सिंह ने बताया कि आलू की फसल पर पाला पड़ने से पौधे सूख गए है। आलू की फसल को बचाने के लिए कई प्रयास किए लेकिन सारे बेकार गए। पैदावार घटने के कारण आलू की खेती में खर्च रकम भी निकलाना भी मुश्किल पड़ेगा।
जिला उद्यान अधिकारी मनोज कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि मौसम की मार का सबसे अधिक आलू की फसल पर प्रभाव पड़ा है। इससे आलू की पैदावार में गिरावट आई है। इसका आंकलन करवाया जा रहा है।