छिबरामऊ। आजादी के बाद भले ही राजनीतिक गलियारों में कांग्रेस की धमक रही हो लेकिन छिबरामऊ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस सिर्फ दो बार जीत सकी है। एक बार साल 1969 में पूर्व चेयरमैन डॉ. जगदीश्वरदयाल अग्निहोत्री उर्फ डॉ. मुन्ना ने यह सीट जीती थी तो दूसरी बार 1985 में युवा वकील संतोष चतुर्वेदी ने कांग्रेस के टिकट पर जीतकर प्रतिनिधित्व किया था। खास बात ये है कि संतोष चतुर्वेदी ने विपक्ष में मिनी मुख्यमंत्री कहे जाने वाले दिग्गज नेता छोटे सिंह यादव चुनाव में पटखनी दी थी।
पूर्व विधायक संतोष चतुर्वेदी ने पुराने दिन याद करते हुए बताया कि साल 1985 में कांग्रेस के कद्दावर नेता गुरुदत्त शास्त्री, जागेश्वर प्रसाद मिश्रा, राम विलास तिवारी, श्रीनिवास मिश्रा समेत करीब 19 लोगों ने टिकट मांगा था। बताया कि वे खुद ब्लाक प्रमुख जागेश्वर प्रसाद मिश्रा को टिकट दिलाने के लिए पैरवी करने दिल्ली गए थे।
यहां संसदीय कार्य राज्यमंत्री एवं प्रभारी शीला दीक्षित ने सभी आवेदकों को दरकिनार करते हुए 32 साल के संतोष चतुर्वेदी को टिकट देने की घोषणा कर दी। चुनाव में उनके सामने छोटे सिंह यादव थे, जिन्हें 69 वोटों से हराकर संतोष विधानसभा पहुंचे। उन्होंने बताया कि विधानसभा में कई विधायक उन्हें महज इसलिए बधाई देने आए क्योंकि उन्होंने दिग्गज नेता छोटे सिंह को पटखनी दी थी।
पूर्व विधायक ने बताया कि वर्तमान की तरह से उस समय कार्यकर्ताओं की भीड़ साथ नहीं चलती थी। साइकिलों, बाइकों, जीप व खुली जिप्सी से चुनाव प्रचार होता था। उनके पास वाहन न होने पर समाजसेवी एवं पूर्व जिपंस सतीश चतुर्वेदी ने उन्हें प्रचार के लिए जीप उपलब्ध कराई थी। पूरे चुनाव प्रचार में महज 65 हजार रुपए खर्च हुए थे, उस समय चुनाव प्रचार में 60 हजार रुपए खर्च करने की अनुमति थी।
चुनाव प्रचार के दौरान साथ चलने वाले वालिंटियर उन दिनों खाना घरों से साथ लेकर आते थे। देर रात तक चुनाव प्रचार चलता था। नींद भी कार में ही पूरी होती थी। कार्यकर्ता घरों से ही लेई बनाकर लाते थे और दीवारों पर पोस्टर चस्पा करते थे। उस समय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ 50 वकीलों ने उनका भरपूर सहयोग किया।
हाईकमान से उन्हें टिकट मिलने पर विधानसभा क्षेत्र के बुजुर्गों में नाराजगी पैदा हो गई थी। जैसे-जैसे समय बीता, नाराजगी दूर होती गई। अंतिम दौर में उनके मार्गदर्शन में जीत हासिल हुई।
election- फोटो : CHIBRAMAU